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मुस्लिम मुआशरा के सुलगते मसाइल पर शोरा-को क़लम उठाने की तलक़ीन

हैदराबाद 25 दिसमबर (सियासत न्यूज़) मुआशरा के सुलगते मसाइल पर शोरा-को क़लम उठाना चाहिये। लड़कीयों की शादी ब्याह का मसला हो या बेराह रवी का इस में समाज केज़िम्मा दारान में उर्दू शोरा-, कलमकार भी अपना रोल अदा करें। इन ख़्यालात काइज़हा

हैदराबाद 25 दिसमबर (सियासत न्यूज़) मुआशरा के सुलगते मसाइल पर शोरा-को क़लम उठाना चाहिये। लड़कीयों की शादी ब्याह का मसला हो या बेराह रवी का इस में समाज केज़िम्मा दारान में उर्दू शोरा-, कलमकार भी अपना रोल अदा करें। इन ख़्यालात काइज़हार जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ऐडीटर सियासत ने यहां गूंज अदबी एलबम की रस्म इजराईतक़रीब को मुख़ातब करते हुए किया और कहाकि उर्दू में ही नहीं बल्कि शुमाली हिंद काग़लबा हर शोबा में है। उर्दू शायर अपने मजमूआ कलाम को शाय करते हुए शेअरी सिनफ़में इज़ाफ़ा ज़रूर करता है लेकिन उर्दू अदब में नहीं। जनाब जमील निज़ाम आबादी ने जोअदबी एलबम शाय क्या ये उर्दू अदब में इज़ाफ़ा है।

इस कामयाब कोशिश पर उन्हों नेइदारा गूंज को मुबारकबाद दी और कहाकि इदारा सियासत बहुत जल्द शोबा नशर-ओ-इशाअत को क़ायम करते हुए नायाब और कमयाब कुतुब जोकि कुतुब ख़ानों की अलमारियों में सड़ रही है इस को ज़िंदा रखने के लिए हर साल ऐसे दस्तावेज़ात को शाय करने कामंसूबा बनाया है। हिंदूस्तान में मख़दूम की सदी और पाकिस्तान में फ़ैज़ की सदी इस साल मनाई गई लेकिन इस को इस तरह नहीं मनाया गया जैसा मनाना था। जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने गूंज अदबी एलबम की इशाअत पर मुबारकबाद देते हुए इस के मयार और इंसाफ़ की सताइश की। अल्लामा एजाज़ फ़र्ख़ ने इस मौक़ा पर इज़हार-ए-ख़्याल करते हुए कहाकि उर्दू में जो काम हैदराबाद में होरहा है इस की मुल्क भर में मिसाल नहीं मिलती।

उन्हों ने परज़ोर अंदाज़ में उर्दू की शीरीनी और इस की नज़ाकत को ब्यान किया और अदबी एलबम की इशाअत को जमील साहिब की दीवानगी क़रार दिया कि उन्हों ने जिस अर्क़ रेज़ि से ये काम किया वो हर एतबार से लायक़ सताइश है। आलमी उर्दू एडीटरस कान्फ़्रैंस के मौक़ा पर एक ज़ख़ीम किताब की रस्म इजराई के हवाला से हैदराबाद की तारीख़ को अज़सर-ए-नौतसावीर के साथ पेश करना एक कारनामा होगा। जनाब सय्यद शाह नूर उल-हक़ कादरीसाबिक़ सदर नशीन उर्दू एकेडेमी ए पी ने कहाकि उर्दू के काज़ के लिए जो भी काम किया जा रहा है इस की हौसलाअफ़्ज़ाई की ज़रूरत है।

इस मौक़ा पर उसके अफ़ज़ल उद्दीनसाबिक़ नायब सदर उर्दू एकेडेमी ने तक़रीर करते हुए कहाकि उर्दू की इस अदबी महफ़िल में वो एक उर्दू के सिपाही की हैसियत से जो भी काम होगा हर दम तैय्यार रहने की बात कही। जनाब जमील निज़ाम आबादी कन्वीनर इदारा गूंज ने ख़ैरमक़दमी तक़रीर की और इस अदबी एलबम की तैय्यारी के लिए जिन मराहिल से गुज़रे इन का हवाला दिया। जलसा का आग़ाज़ मौलाना नूर उलहोदा की क़ेरत कलाम पाक से हुआ। निज़ामत एम ए हमीद ने अंजाम दी। आख़िर में मुमताज़ शायर रहमान जामी की ज़ेर-ए-सदारत मुशायरा मुनाक़िद हुआ। इस तक़रीब में शोरा-, उदबा , उर्दू के क़लमकारों की कसीर तादाद ने शिरकत की। मुहम्मद मुईद, अबदुलग़फ़्फ़ार आमिर ने मुआवनत की।

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