Tuesday , December 12 2017

मुस्लिम मुआशरा को फुज़ूल खर्ची और नुमाइशी कामों से बचाने की ज़रूरत

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि उन के हालिया दौरा लंदन और दुबई और सऊदी अरब के मौक़ा पर हैदराबादियों ने उन से मुतालिबा किया कि उन मुक़ामात (ख़लीजी और मग़रिबी ममालिक) में भी दूबदू प्रोग्राम रखे जाएं क्योंकि दुनिया भर में आज मुस्लिम लड़कों और लड़

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि उन के हालिया दौरा लंदन और दुबई और सऊदी अरब के मौक़ा पर हैदराबादियों ने उन से मुतालिबा किया कि उन मुक़ामात (ख़लीजी और मग़रिबी ममालिक) में भी दूबदू प्रोग्राम रखे जाएं क्योंकि दुनिया भर में आज मुस्लिम लड़कों और लड़कीयों की शादीयों का मसअला संगीन नोईयत अख़्तियार करता जा रहा है। कई मुल्कों से उन्हें दूबदू प्रोग्राम की कामयाबी के सिलसिले में मुबारकबादी के प्यामात मौसूल होते हैं।

उन्हों ने कहा कि हैदराबाद में शादी के मौक़ा पर दावतें ना सिर्फ़ मेज़बानों बल्कि मेहमानों के लिए भी तकलीफ़देह हो रही हैं, दावत के दूसरे रोज़ ही खाना सड़कों और कुंडियों के पास फेंक दिया जाता है। ये तर्ज़े अमल ना सिर्फ़ अल्लाह की नाराज़गी का बाइस है बल्कि ग़ैर मुस्लिमों में भी इस के ग़लत तास्सुरात क़ायम हो रहे हैं।

मौलाना हाफ़िज़ और क़ारी सैयद शाह मुर्तज़ा अली सूफ़ी हैदर कादरी ने इदारा सियासत और माइनॉरिटीज़ डेवलप्मेंट फ़ोरम को मुबारकबाद दी कि उन्हों ने मुआशरा के सुलगते हुए मसअले को हल करने के लिए अमली तौर पर सरगर्म अमल है, उन्हों ने तलक़ीन की कि इस्लाम सलामती वाला दीन है लेकिन हम शादी ब्याह के मुआमलात को अहकामात अल्लाह और अपने प्यारे रसूल अरबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की तालीमात के ख़िलाफ़ बना दिया है।

रिश्तों के इंतिख़ाब में भी हम तिजारती अंदाज़ और रवैय्या को अपनाए हुए हैं। इस सूरते हाल का नतीजा ये है कि आज ग़रीब मुसलमान लड़की की पैदाइश पर ख़ुशी के बजाय ब्रहमी का इज़हार कर रहा है, हम इस हक़ीक़त को भूल गए हैं कि मालिके दो जहां मुसब्बुल असबाब है।

मौलाना ने कहा कि हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अच्छे कामों में एक दूसरे की मदद करने की हिदायत दी है लेकिन हम बुरे कामों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं लेकिन मिल्लत के सुधार के सिलसिले में होने वाले इक़दामात पर नुक्ता चीनी करते हैं।

उन्हों ने मुसलमानों से अपील की कि वो जनाब ज़ाहिद अली ख़ान और एम डी एफ़ की तहरीक का हर तरह से तआवुन करें और मुस्लिम मुआशरा को फुज़ूल खर्ची, बेजा रसूमात और नुमाइशी कामों से बचाएं। इब्तिदा में जनाब आबिद सिद्दीक़ी सदर एम डी एफ़ ने ख़ौर मक़दम करते हुए कहा कि एम डी एफ़ की कोशिशों से अब तक 24 दूबदू मुलाक़ात प्रोग्राम्स के ज़रीए 4000 से ज़ाएद रिश्ते तए पाए और ये काम शहर से निकल कर अज़ला में भी फैल चुका है।

चुनांचे महबूबनगर, करीमनगर में दूबदू प्रोग्राम निहायत कामयाबी के साथ मुनाक़िद हुए। इदारा सियासत की जानिब से शादी के लिए तैयार कर्दा कुरानी दुआओं के वर्कीए भी शुरका में तक़सीम किए गए। 25वां दूबदू प्रोग्राम तक़रीबन 4 बजे इख़तेताम को पहुंचा।

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