Monday , December 18 2017

मुस्लिम मुआशरे में मग़रिबी तहज़ीब का परागंदा माहौल अफ़सोसनाक

हीनसा। 02 जनवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) मौजूदा मुआशरे में नौजवान लड़के और लड़कीयां अपने दीनी माहौल को पसेपुश्त डालते हुए मग़रिबी तहज़ीब के परागंदा माहौल में ढलते जा रहे हैं और मग़रिब की फ़ैशन परस्ती ने अपना गरवीदा बनाकर उन्

हीनसा। 02 जनवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) मौजूदा मुआशरे में नौजवान लड़के और लड़कीयां अपने दीनी माहौल को पसेपुश्त डालते हुए मग़रिबी तहज़ीब के परागंदा माहौल में ढलते जा रहे हैं और मग़रिब की फ़ैशन परस्ती ने अपना गरवीदा बनाकर उन्हें धोके में डाल दिया। इन ख़्यालात का इज़हार मौलाना मुहम्मद ज़िया उद्दीन जावेद मुहम्मदी साबिक़ सैक्रेटरी हलक़ा ऐस आई ओ आंधरा प्रदेश ने भैंसा मैं ऐस आई ओ के जलसा को मुख़ातब करते हुए किया।

ऐस आई ओ भैंसा यूनिट की जानिब से बुराईयों से पाक समाज की तामीर के उनवान से बेदारी मुहिम का सिलसिला जारी है। इसी सिलसिले की कड़ी के तौर पर भैंसा में टेंट हाउस लाईन चौक पर एक जल्सा-ए-आम का इनइक़ाद अमल में आया। इस जलसा में सय्यद ख़लील सदर मुक़ामी जमात-ए-इस्लामी भैंसा, मुईन अहमद सदर ऐस आई ओ भैंसा, हफ़ीज़ ख़ां सैक्रेटरी ऐस आई ओ के इलावा दीगर ज़िम्मा दारान जमात और ऐस आई ओ के कारकुनान के इलावा मुस्लमानों कसीर तादाद मौजूद थी।

दौरान ख़िताब मौलाना ज़िया उद्दीन ने कहा कि आज के इस दौर में ग़ैर महरम लड़के और लड़कीयों का मेल जोल मुस्लिम क़ौम के लिए लम्हा-ए-फ़िक्र है, क्योंकि तफ़रीही मुक़ामात, पार्कस और दीगर इलाक़ों में मुस्लिम लड़कीयों और ख़वातीन की कसीर तादाद पहुंच रही है, जहां बेपर्दगी का ये हाल है कि खुले आम नाज़ेबा हरकतें की जा रही हैं। तालीमी माहौल भी इस लानत का शिकार हो चुका है।

इलावा अज़ीं टी वी, सेल फ़ोन और इंटरनैट ने भी मुआशरे को बिगाड़ने के तमाम सामान फ़राहम करदिए हैं, जहां आज़ादी के नाम पर औरत का इस्तिहसाल किया जा रहा है। आज बेहयाई के मुज़ाहरा को तरक़्क़ी के नाम पर अच्छा समझा जा रहा है। मौलाना ने कहा कि आज मर्द-ओ-ख़वातीन के आपसी मेल जोल को तहज़ीब का नाम दिया जा रहा है, जब कि इस्लाम इन सारी चीज़ों को मुख़र्रिब-ए-अख़लाक़ और हराम क़रार देता है। मौलाना ने कहा कि देन इस्लाम अल्लाह ताली का ऐसा पाकीज़ा देन है, जो फ़ित्रत इंसानी के मुताबिक़ है। इस प्यारे देन ने हक़ूक़-ए-इंसानी की पासदारी की है।

उन्हों ने मुस्लमानों को इस बात की तलक़ीन की कि वो पहले बुराईयों की पहचान करें, इस से पहले कि बुराईयां पूरे समाज को बर्बाद करदें। उन्हों ने कहा कि पहले ख़ुद को इन बुराईयों से रोकें और अपने मिज़ाज में एतिदाल पैदा करें और फिर ठंडे दिल से उन मसाइल की जानिब तवज्जा दें। ख़ुद को तकब्बुर और इश्तिआल से बचाएं और अपनी नरम गुफ़्तगु के ज़रीया बुराईयों का ख़ातमा करें।

मौलाना ने आख़िर में उम्मत मुस्लिमा के तमाम ज़िम्मेदारों से ख़ाहिश की कि वो अपने बच्चों की जानिब ख़ुसूसी तवज्जा देते हुए उन पर निगाह रखें, क्योंकि मौजूदा माहौल इंतिहाई ख़राब हो चुका है और बुराईयां खुले आम हमारे घरों में दाख़िल हो रही हैं, जिस का शिकार हमारी नई नसल हो रही है। ज़रूरत इस बात की है कि मुआशरे की अज़ सरनू तामीर के लिए आगे आएं। इस जलसा को सय्यद ख़लील अहमद और मुईन अहमद के इलावा दूसरों ने भी मुख़ातब किया।

TOPPOPULARRECENT