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मुस्लिम रिजर्वेशन की आस में हुकूमत

हुकूमत अक्लियतों , खासतौर से मुसलमानों के लिए करना तो बहुत कुछ चाहती है, लेकिन कर नहीं पा रही है। रियासती हुकुमते जरूरी ताउन नहीं करतीं। हाथ बंधे हैं। हुकूमत की नजर में मुसलमानों की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट मुल्क के नौकरशाह हैं।

हुकूमत अक्लियतों , खासतौर से मुसलमानों के लिए करना तो बहुत कुछ चाहती है, लेकिन कर नहीं पा रही है। रियासती हुकुमते जरूरी ताउन नहीं करतीं। हाथ बंधे हैं। हुकूमत की नजर में मुसलमानों की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट मुल्क के नौकरशाह हैं। बाद में हुकूमतें । फिर भी मरकज़ी हुकूमत लोकसभा इलेक्शन से पहले मुसलमानों के रिजर्वेशन को लेकर नाउम्मीद नहीं है। उसे लगता है कि रिजर्वेशन की ताइद में उसके पास ठोस तर्क हैं और वह सुप्रीम कोर्ट में जीत जाएगी।

अक्लीयती मामलों के मरकज़ी वज़ीर के. रहमान खान ने अक्लीयतो के मसलों पर ‘रोजनामा जागरण’ से खुलकर बातचीत की। नौकरियों व ऊँची तालीम में 4.5 फीसद रिजर्वेशन (सब कोटा) के सवाल पर कहा कि मामला Ministry of Human Resource Development व Personnel and Training (डीओपीटी) से जुड़ा है। हम कानून के वज़ीर और अटॉर्नी जनरल को खत लिख इसे आगे बढ़ाने की पैरवी कर रहे हैं।

मुझे लग रहा कि सुप्रीम कोर्ट में राहत मिलेगी, क्योंकि साबिक में केस के हकाएक सही तरीके से नहीं रखे गए थे। क्या वजह है कि केस की सुनवाई में इतना वक्त लग गया? उन्होंने कहा,’वजह क्या मैं क्या कहूं? माय हैंड्स आर टाइट (मेरे हाथ बंधे हैं)’। क्या हुकूमत को लोकसभा इलेक्शन से पहले इस पर फैसले की उम्मीद है? खान का जवाब था, ‘हमारी कोशिश है’।

अक्लीयतों की तालीम व तरक्की में सबसे बड़ी दिक्कत क्या है? मरकज़ी वज़ीर ने कहा, ‘नौकरशाही का अड़ंगा। वह अक्लीयतों के मामलों में Constitution को मनफी से पेश कर रही है। उसका रवैया मनफी है। हर काम में अडंगा लगा देती है। सच कहा जाए तो नौकरशाही आईन के मुताबिक बुनियादी हुकूक को नकार रही है और वह जो कहती है, हुकूमतों में उसका जिरह करने की ताकत नहीं है।

वज़ीर ए आज़म के नए 15 नुकतई प्रोग्राम पर नौकरशाही अगर ईमानदारी से अमल कर दे, फिर तो बड़े मसले हल हो जाएंगे। लेकिन एक भी नौकरशाह ठीक से काम नहीं कर रहा है। सारे CMs को खत लिख चुका हूं। फिर भी इस वज़ारत के प्रोग्रामो में किसी की दिलचस्पी नहीं है।

दहशतगर्द वाकियात को लेकर जेलों में बंद बेगुनाहों के मसले पर उन्होंने कहा कि मुसलमानों में यह जज़बा पैदा हो रहा है कि उनके ही बच्चे क्यों? यह हालात ठीक नहीं। किसी मुसलमान ने नहीं कहा कि शक है तो मत पकड़ो, लेकिन हिरासत में लेते हो तो चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल करो। पांच-पांच, से-दस साल जेल में अनायास रखने का क्या मतलब? इसका हल क्या है? खान ने कहा,’हमने वज़ीर ए आज़म , वज़ीर ए दाखिला को मुसलसल खत लिखा कि ऐसे मामलों में एक जाएज़ा कमेटी बननी चाहिए। आखिर जाएज़ा क्यों नहीं कर सकते। यह न करना इंसानी हुकुक की खिलाफवर्जी है।

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