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मुहम्मद ग़ौस केस: एसआईटी को एक और धक्का

हैदराबाद 29 जुलाई: साबिक़ कॉर्पोरेटर मुहम्मद ग़ौस की अचानक गिरफ़्तारी केस में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (ऐस आई टी) को उस वक़्त मायूसी का सामना करना पड़ा जब नामपल्ली क्रीमिनल कोर्ट ने पुलिस तहवील की दरख़ास्त को ख़ारिज कर दिया और दुसरे 6 मुक़द्दमात में गिरफ़्तार करने के लिए प्रिजनर ट्रांजिट वारंट (पीटी वारंट) जारी करने से भी इनकार कर दिया।

मेट्रोपोलिटन कोर्ट के 14 वें एडिशनल चीफ़ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने मुहम्मद ग़ौस की दरख़ास्त ज़मानत को मुस्तर्द करते हुए सेशन कोर्ट से रुजू होने का मश्वरह दिया। ज़राए ने बताया कि अदालत ने अपने हुक्मनामा में कहा कि मुहम्मद ग़ौस के ख़िलाफ़ दर्ज किए गए मुक़द्दमा में ताज़ीरात-ए-हिंद की दफ़ा 333 (सरकारी मुलाज़िम पर हमला करना) मौजूद है और इस केस की समाअत सेशंस जज के मीटिंग पर लाज़िमी है और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के दायरा कार से बाहर है।

मुहम्मद ग़ौस के वकील मुहम्मद मुज़फ़्फ़र उल्लाह ख़ान शफ़ाअत ने एसआईटी की तरफ से यकतरफ़ा कार्रवाई से मुताल्लिक़ तफ़सीलात अदालत के इलम में लाई और बताया कि जो केस शवाहिद की अदम दस्तयाबी की बुनियाद पर बंद किया जा चुका है उन के मुवक्किल को बे-जा तौर पर गिरफ़्तार करके जेल में महरूस रखा गया। दरख़ास्त ज़मानत सेशंस अदालत में दाख़िल की जाएगी।

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