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मुख़्तार के बेटे को सपा वाराणसी में लड़ा सकती है चुनाव

लखनऊ: (फैसल फरीद):  काफी जद्दोजहद के बाद कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के बाद अब बड़ी खबर आ रही है. सपा मुख़्तार अंसारी और उनके भाई सिबगतुल्लाह अंसारी (दोनों विधायक) के बेटों को आगामी विधान सभा में टिकट डे सकती हैं. कौएद का विलय शुरू में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा किया गया था लेकिन सपा में मचे पारिवारिक घमासान के बाद आखिरकार विलय को मंज़ूरी मिल गयी. बीते दिनों गाजीपुर में हुई सपा की रैली में पूर्व सांसद अफज़ल अंसारी मंच पर मौजूद थे और मुलायम सिंह ने खुले शब्दों में उनकी तारीफ भी की.

सपा के सूत्र बताते हैं की कौएद को लगभग १० सीटो पर चुनाव लड़ने की तयारी हैं. इसमें मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास को वाराणसी की किसी सीट से सपा द्वारा चुनाव लड़ाया जा सकता हैं.सिबगतुल्लाह अंसारी के बेटे को गाजीपुर में किसी सीट से लड़ाया जा सकता हैं. दोनों युवा अभी सपा के युवजन सभा में सक्रिय हैं. मुख़्तार अंसारी खुद भी वाराणसी से लोक सबह चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ चुके हैं. साफ़ हैं उम्मीदवार की चुनाव जीतने की क्षमता को देखते हुए सपा को टिकैत देने में कोई झिझक नहीं हैं.

पूर्वांचल में मुस्लिम वोटो को ध्यान में रखते हुए उसे अंसारी परिवार को आगे बढ़ाना पड़ेगा. हालांकि इस कदम से सपा में घमासान मच सकता हैं. जिन सीटो पर कौएद के उम्मीदवार सामने आयेंगे वहां सपा के पुराने नेताओ का टिकट कटेगा और रोष फैलेगा. लेकिन इस वक़्त सपा को ज्यादा से ज्यादा सीटें चाहिए. इसके लिए चाहे उसे किसी का भी टिकट काटना पडे.

यही नहीं सपा अंसारी परिवार के सदस्यों को आगामी विधान सभा चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में भी चुनावी समर में उतारेगी. देखना ये होगा की इस फैसले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की क्या प्रतिक्रिया होगी और महासचिव रामगोपाल जिनका दावा है की टिकट बिना उनके नहीं बाटेंगे, वो अब क्या कहेंगे. बचने का एकमात्र तरीका है की कह दिया जाये की टिकट सपा का केंद्रीय संसदीय बोर्ड देगा, लेकिन इस बोर्ड ने अब तक सिर्फ एक फैसला लिया हैं—सारे फैसले लेने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष को देने का फैसला.

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