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मुज़फ़्फ़र नगर फ़सादाद के बच्चों में हुसूले इल्म का जुनून

शायरे मशरिक़ अल्लामा इक़बाल ने बच्चे की दुआ नामी ये नज़म-
‘लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
ज़िंदगी शम्मा की सूरत हो ख़ुदा यह मेरी’
‘दूर दुनिया का मरे दम से अंधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए’

लिखते हुए शायद आने वाले बच्चों के हालात और उन्हें दर्पेश आने वाले वाक़ियात का अच्छी तरह अंदाज़ा कर लिया था तब ही तो आज बर्रे सग़ीर के कोने कोने में अल्लामा इक़बाल की ये दुआइया नज़म की गूंज सुनाई देती है खास तौर पर स्कूलों में इस नज़म को असेंबली में बच्चे बड़ी ऊंची आवाज़ में पढ़ते हैं।

क़ारईन आप उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ़्फ़र नगर को शायद अभी तक भूल नहीं पाए होंगे जहां सितंबर 2013 में आज़ाद हिंद की तारीख के भयानक मुस्लिमकुश फ़सादाद में से एक फ़साद पेश आया था फ़सादाद के इस वाक़िया में एक तरह से मुसलमानों का क़त्ले आम किया गया। उनके घरों को लूटा गया ख़वातीन और नौजवान लड़कियों की अस्मतें तार-तार की गएं।

हद तो ये है कि फ़िर्कापरस्त दरिंदों ने कम अज़ कम 65 मुसलमानों को शहीद कर दिया। सरकारी आदादो शुमार के मुताबिक़ इन फ़सादाद में 42 मुसलमान मारे गए थे और 50 हज़ार से ज़ाइद मुसलमानों को अपने घर-बार छोड़कर महफ़ूज़ इलाक़ों में मुंतक़िल होना पड़ा था। मुसीबत की इस घड़ी में रोज़नामा सियासत और फ़ैज़ आम ट्रस्ट ने मुज़फ़्फ़र नगर के मुख़्तलिफ़ गाँव से अपनी जानें बचा कर महफ़ूज़ इलाक़ों में पहुंचने वाले मुसलमानों की मदद का बीड़ा उठाया।

इस ज़िमन में एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने मुज़फ़्फ़र नगर के मुसीबत ज़दा भाईयों और बहनों के आँसू पोंछने और उन्हें दिलासा देने की ख़ातिर सियासत मिल्लत फ़ंड से 10 लाख रुपये जारी किए।

एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ान और फ़ैज़ आम ट्रस्ट के सेक्रेट्री जनाब इफ़्तिख़ार हुसैन ने मैनेजिंग एडीटर सियासत जनाब ज़हीर उद्दीन अली ख़ान और ट्रस्टी फ़ैज़ आम ट्रस्ट जनाब रिज़वान हैदर के हमराह मुज़फ़्फ़र नगर के मुतास्सिरा इलाक़ों का दौरा करते हुए देखा कि मुज़फ़्फ़र नगर के मुसलमान राजपूतों के यहाँ बंधूवा मज़दूरों की हैसियत से काम करने के बाइस तालीम से ही महरूम हो गए।

चुनांचे सियासत ने फ़ैज़ आम ट्रस्ट के तआवुन और इश्तिराक से जोगिया खेड़ा में हैदराबाद मिल्लत पब्लिक स्कूल के नाम से दो स्कूल्स क़ायम किए जिन में नर्सरी ता सातवीं तक क्लासेस चलाई जा रही हैं। इन स्कूलों में जुमला 18 टीचर्स ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं।

नर्सरी और सातवीं जमातों में ज़ेरे तालीम तलबा तालिबात की उमरें 5 से 13 साल के दरमियान हैं ख़ुशी की बात ये है कि एक साल के दौरान जोगिया खेड़ा और आस-पास के गाँव से आने वाले तलबा की तादाद में मुसलसल इज़ाफ़ा हो रहा है जिसके बाइस नर्सरी के चार सेक्शन नर्सरी ग्रीन, नर्सरी अल्फ़ा, नर्सरी राक, नर्सरी दकमेन्ड चलाए जा रहे हैं। बहरे हाल मुज़फ़्फ़र नगर के मुसलमान सियासत और फ़ैज़ आम ट्रस्ट के इलावा हैदराबादी मुसलमानों के हक़ में दुआगो हैं।

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