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में कहानीयों वाले धर्म‌ से उकता गया हूँ

मिस्टर अरेंसर्ट‌ को मिस्टर आर ई वॉकर ने इस्लाम से रोशनास कराया, जिन्हों ने १९३० में इस्लाम क़बूल किया था। मिस्टर वॉकर लिखते हैं कि ये नौजवान गुज़रे हुए ज़माने के क़िस्से कहानीयों पर मब्नी दीन से बेज़ार है, उसे अपने किरदार की तामीर क

मिस्टर अरेंसर्ट‌ को मिस्टर आर ई वॉकर ने इस्लाम से रोशनास कराया, जिन्हों ने १९३० में इस्लाम क़बूल किया था। मिस्टर वॉकर लिखते हैं कि ये नौजवान गुज़रे हुए ज़माने के क़िस्से कहानीयों पर मब्नी दीन से बेज़ार है, उसे अपने किरदार की तामीर के लिए एक ठोस बुनियाद चाहीए। ये ठोस बुनियाद उसे ईसाईयत में ना मिल सकी, लिहाज़ा इस ने इस्लाम क़बूल करलिया।

मिस्टर अरेंसर्ट‌ ने ये अलानिया इक़रार किया कि मैं अरेंसर्ट‌ वलद फ़राँज़ लंच ईमानदारी और ख़ुलूस के साथ अपनी आज़ादाना मर्ज़ी से ये इक़रार और एलान करता हूँ कि मैंने इस्लाम बतौर दिन अपना लिया है। मैं सिर्फ और सिर्फ अल्लाह वाहिद लाशरीक की इबादत करता हूँ और हज़रत मुहम्मद स.व. को अल्लाह का बंदा और रसूल मानता हूँ, नीज़ में तमाम अन्बीया , हज़रत इबराहीम, हज़रत मूसा और हज़रत इसा अलैहिम अस्सलाम वग़ैरहुम का बराबर एहतिराम करता हूँ और अल्लाह की तौफ़ीक़ से मैं इस्लामी तर्ज़ हयात पर ज़िंदगी गुज़ारुंगा।

इस्लाम का पैग़ाम इत्तिहाद
आप ने पूछा है कि क्या में कोई इस्लामी नाम पसंद करूंगा?। क्यों नहीं? यक़ीनन में इस्लामी नाम ही पसंद करूंगा। मेरे ख़्याल में नाम मुहम्मद बहुत मुनासिब रहेगा, क्योंकि ये हमेशा इस मुहतरम शख़्स की याद दिलाता रहेगा, जो बशारतें लेकर तशरीफ़ लाए। मेरे क़बूल इस्लाम की वजह नीचे लीखी हूइं हैं:
(1) लाशऊरी तौर पर मैं हमेशा मुसल्मान ही रहा हूँ, लेकिन मैं बरसों अपने समाजी बाईकॉट के ख़ौफ़ से निकलने की कोशिश करता रहा हूँ। अल्लाह का शुक्र है कि ये ख़ौफ़ अब रुकावट नहीं रहा।
(2) इस्लाम एक वहदत है, जिस ने नस्ली इम्तेयाज़ात को काम्याबी से ख़त्म‌ करके इंसानियत को इस तरह यक्जा और हम आहंग कर दिया है कि कोई और मज्हब एसा नहीं कर सका।
(3) उस की इबादात रंगा रंग नहीं हैं, फिर भी इन में एक हुस्न और वुसअत है और ये नर्गिस के फूलों की तरह रूह को मुअत्तर-ओ-सेराब करती हैं।
(4) इंसान के ख़ुलूस की आज़माईश के लिए इस्लाम हज का तक़ाज़ा करता है और इस के ज़रीया से उसे एक इत्मीनान बख़श तजुर्बा फ़राहम करता है, क्योंकि इस में इंसान थोड़ा सा दे कर बहुत कुछ हासिल कर लेता है।

(अरेंसर्ट‌ टी डब्लयू ब्लैक मोर। इस्लामिक रिव्यू: जून १९३३य-ए-)

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