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में नहीं आऊँगा बेटा सरकारी दवाख़ानों पर अवामी तास्सुर

सरकारी दवाख़ानों की कारकर्दगी के बारे में अवामी तास्सुर बेहतर नहीं। जब कभी सरकारी दवाखाने रुजू होने की बात की जाती है तो कहा जाता है में नहीं आऊँगा बेटा सरकारी दवाख़ाना। ये बात चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ ने कही और तिब्बी ख़िदम

सरकारी दवाख़ानों की कारकर्दगी के बारे में अवामी तास्सुर बेहतर नहीं। जब कभी सरकारी दवाखाने रुजू होने की बात की जाती है तो कहा जाता है में नहीं आऊँगा बेटा सरकारी दवाख़ाना। ये बात चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ ने कही और तिब्बी ख़िदमात को बेहतर बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

उन्होंने इंडियन इंस्टीटियूट आफ़ पब्लिक हेल्थ हैदराबाद कैंपस का राजिंदरनगर में संग-ए-बुनियाद रखा। चीफ़ मिनिस्टर ने कहा कि हुकूमत सेहत-ओ-तबाबत के शोबा पर सालाना 5 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च कररही है, इस के बावजूद तिब्बी ख़िदमात इतमीनान बख़श नहीं है।

उन्होंने कहा कि देही इलाक़ों में तिब्बी सहूलतें बेहतर बनाने की ज़रूरत है। चीफ़ मिनिस्टर ने कहा कि दवाख़ानों को चलाने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम मुनाक़िद नहीं किया जाता। उन्होंने शोबा सेहत-ओ-तबाबत में बेहतर तबदीलीयों और साथ ही साथ तिब्बी अमला डॉक्टर्स के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स मुनाक़िद करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने रियासत तेलंगाना को एक मिसाली मर्कज़ सेहत के तौर पर तरक़्क़ी देने के अज़म का इज़हार किया। इस मौकॆ पर वज़ीर-ए-सेहत डाक्टर लकशमा रेड्डी , वज़ीर ट्रांसपोर्ट पी महिन्द्र रेड्डी और दीगर मौजूद थे।

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