मेघालय में ‘संगमा’ की सरकार, CM होंगे कोनराड

मेघालय में ‘संगमा’ की सरकार, CM होंगे कोनराड

मेघालय में नई सरकार का गठन आज होने जा रहा है. पिछली और नई सरकार में सब कुछ बदल जाएगा, लेकिन एक चीज नहीं बदलेगा और वो है मुख्यमंत्री का सरनेम (उपनाम).

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेता कोनराड संगमा राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. वह लोकसभा के पूर्व स्पीकर पीए संगमा के बेटे हैं. 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा चुनाव में 19 सदस्यों वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी बीजेपी (2), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6), एचएसपीडीपी (2) और पीडीएफ (4) के अलावा एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से मिली-जुली सरकार बनाने जा रही है. इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन हासिल है.

कोनराड संगमा से पहले राज्य के मुख्यमंत्री का नाम था मुकुल संगमा. मुकुल संगमा के नेतृत्व में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. अब कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई है और बीजेपी समेत 6 अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में एक नए संगमा का नेतृत्व राज्य को मिलने जा रहा है.

पहले सीएम भी संगमा रहे

राज्य में संगमा उपनाम का दबदबा शुरुआत से ही रहा है. 46 साल के विधानसभा इतिहास में कोनराड राज्य के 12वें मुख्यमंत्री होंगे जिसमें संगमा उपनाम वाले वह चौथे सीएम हैं. 1972 से लेकर अब तक राज्य में संगमा का शासन करीब 20 साल तक रहा है.

राज्य में पहली विधानसभा मार्च 1972 में चुनी गई और ऑल पार्टी हिल्स लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) की सरकार बनी, जिसका नेतृत्व किया विलियम ए संगमा ने. संगमा 18 मार्च, 1972 से लेकर 21 नवंबर 1976 तक इसी पार्टी के साथ सत्ता में रहे. बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए और अगली सरकार बनाई. वह कुल 3 बार मुख्यमंत्री रहे.

पिता के बाद अब बेटा
इसके बाद पीए संगमा के रूप में राज्य को बतौर मुख्यमंत्री दूसरे संगमा मिले. चौथे विधानसभा के दौरान वह फरवरी 1988 में मुख्यमंत्री बने. वह 25 मार्च, 1990 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. लेकिन इनके जाने के बाद राज्य को अगला संगमा मुख्यमंत्री मिलने में 20 साल लग गए.

आठवें विधानसभा के दौरान 20 अप्रैल, 2010 को मुकुल संगमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इस विधानसभा में सीएम पद की शपथ लेने वाले वह चौथे नेता रहे. कांग्रेस की ओर से सीएम बने मुकुल 2013 तक इस पद पर बने रहे. इसके बाद 2013 में राज्य में विधानसभा चुनाव हुए जिसमें उनकी अगुवाई में पार्टी ने बाजी मार ली. और अगले 5 साल के लिए वह मुख्यमंत्री बने रहे.

मुकुल संगमा राज्य में 2 बार सीएम रहे लेकिन 8 सालों तक लगातार सत्ता में बने रहे. इस बार भी उनकी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा और 21 सीट हासिल कर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी. लेकिन बीजेपी के रणनीतिकारों ने एक के बाद एक ऐसी योजना बनाई जिससे वह सरकार बनाने के मामले में पिछड़ गई और कांग्रेस को सत्ता से दूर होना पड़ा.

नए गठबंधन के साथ एक और संगमा सत्ता में आने जा रहे हैं, देखना होगा कि कोनराड संगमा इस पद पर कितने समय तक विराजमान रहते हैं. उनके पिता करीब 25 महीने राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे.

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