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मेरा अफ़सोस ख़त्म हुवा:ग़ुलाम अली

कोलकता 13 जनवरी: पाकिस्तानी ग़ज़ल गुलूकार ग़ुलाम अली ने नेताजी इंडोर स्टेडीयम में अपनी मस्हूर कुन आवाज़ के ज़रीये समां बांध दिया था। उन्होंने कहा कि जहां कहीं वो जाते हैं और अपनी आवाज़ दूसरों को सुनाते हैं तो उन्हें ख़ुशी महसूस होती है लेकिन इस बार वो बेहद ख़ुश हैं। वो अक्सर कोलकता आते रहे हैं लेकिन एसा लगता है कि इस बार वो 50 साल के बाद यहां आए हैं। वो बेहद अफ़्सुर्दा थे और उनकी अफ़्सुर्दगी ख़त्म हो गई।

पटियाला के घराने से ताल्लुक़ रखने वाले 75 साला उस्ताद ग़ुलाम अली ने इन ख़्यालात काइज़हार किया। वाज़िह रहे कि पिछ्ले साल शिवसेना के एहतेजाज की वजह से उन्हें मुंबई में अपना प्रोग्राम मंसूख़ करना पड़ा था। स्टेडीयम में शायक़ीन की कसीर तादाद मौजूद थी और जब उन्होंने मशहूर ग़ज़ल चुपके चुपके रात‍-दिन और हंगामा है क्यों बरपा सुनाई तो सामईन झूम उठे। ग़ुलाम अली के फ़र्ज़ंद आमिर अली ने भी प्रोग्राम में हिस्सा लिया।

चीफ़ मिनिस्टर मग़रिबी बंगाल ममता बनर्जी ने ग़ुलाम अली को संगीत सम्राट क़रार देते हुए कहा कि मौसीक़ी की कोई सरहद नहीं होती। उन्होंने कहा कि आपको हम सब के लिए तोहफ़ा के तौर पर फिर यहां आना होगा। उन्होंने कहा कि 12,000 की गुंजाइश के हामिल इस स्टेडीयम में ख्वाहिशमंदों की ग़ैरमामूली तादाद के बावजूद उन्हें जगह ना मिल सकी।बॉलीवुड फ़िल्मसाज़ महेश भट्ट भी शुरका में मौजूद थे।

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