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मेहनत-कश तबक़ा की ख़ुशहाली के लिए सूद के लिए दरवाज़े को बंद करना ज़रूरी

ज़हीराबाद 26 जनवरी: ज़हीराबाद में मुनाक़िदा इस्लामी बैंक की इफ़्तेताही तक़रीब को मुख़ातिब करते हुए जनरल सेक्रेटरी ह्यूमन वेलफेयर फ़ाउंडेशन रियासत तेलंगाना-ओ-आंध्र प्रदेश ने कहा कि मुसलमानों को सूद की लानत से बचाने मआशी ख़ुशहाली लाने और समाज में बेहतर मुक़ाम बनाने के लिए ख़िदमत बैंक का क़ियाम अमल में लाया जा रहा है।

ये मेहनत-कश तबक़ात अलिफ़ बैंक है और मेहनत-कश तबक़ात के चेहरों पर मुस्कुराहट लाना बैंक का मक़सद है। मेहनत-कश अफ़राद दिन रात मेहनत करते हैं और अपने मेहनत की कमाई सूद में अदा कर रहे हैं। सूद के दरवाज़े बंद करने के लिए ये बैंक क़ायम किया गया। मुसलमानों की तहरीक को दूर करना और बच्चों को तालीम से क़रीब करना है। हमने अलाहिदा तेलंगाना हासिल किया मगर एसा तेलंगाना नहीं चाहीए जहां किसान ख़ुदकुशी करें।

सूदखोर ख़ुशी है और मेहनत-कश तबक़ा बदहाल ज़िंदगी गुज़ारे हम एसा तेलंगाना चाहते हैं जहां सब तरक़्क़ी करें इसी जद्द-ओ-जहद का ख़िदमत बैंक एक हिस्सा है। टीआरएस के क़ाइद मिर्ज़ा वहीद बैग मक़बूल ने ख़िदमत बैंक की कारकर्दगी को लाजवाब क़रार देते हुए कहा कि पट्टनचेरो मैं ख़िदमत बैंक की शाख़ क़ायम करने के लिए तआवुन करने का पेशकश करते हुए कहा कि इस के अलावा हुकूमत के ज़िम्मेदारों वुज़रा से नुमाइंदगी करते हुए अक़लियती मालीयाती कारपोरेशन से अक़लियतों को क़र्ज़ फ़राहम करने के लिए कौमियाए हुए बैंकों को अदा करने के लिए जो सब्सीडी की रक़म मुख़तस करके रखी गई है। वो रक़म ख़िदमत बैंक के ज़रीये मुसलमानों में तक़सीम करने के लिए दबाओ डाला जाएगा।

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