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मैं अगर वज़ीर-ए‍ आला (मुख्य मंत्री) बनना चाहता तो अर्सा क़बल बन चुका होता: बी जे डी एम पी

अड्डे शहि में बी जे डी की सफ़ों में इम्कानी इंतेशार की पेश क़यासी के बाद पार्टी एम पी प्यारे मोहन मोहापात्रा ने आज वज़ीर-ए-आला नवीन पटनायक हुकूमत को बेदख़ल करने के किसी भी मंसूबा को मुस्तर्द (रद्द) कर दिया।

अड्डे शहि में बी जे डी की सफ़ों में इम्कानी इंतेशार की पेश क़यासी के बाद पार्टी एम पी प्यारे मोहन मोहापात्रा ने आज वज़ीर-ए-आला नवीन पटनायक हुकूमत को बेदख़ल करने के किसी भी मंसूबा को मुस्तर्द (रद्द) कर दिया।

अलबत्ता उन्होंने ये ज़रूर कहा कि नवीन पटनायक के साथ उनके इख़तिलाफ़ (गड़बड़) हैं, क्योंकि इनका (प्यारे मोहन) ये ख़्याल है कि पटनायक हुकूमत के ज़िद्दी और अड़ियल ब्यूरोक्रेट्स की वजह से हुकूमत बतदरीज अपना कंट्रोल खोती जा रही है।

मिस्टर मोहापात्रा जो हुक्मराँ जमात बी जे डी के मुशीर ( सलाहकार) आला और स्ट्रेटेजिस्ट थे, ने अख़बारी नुमाइंदों ( पत्रकारों)से बात करते हुए कहा कि उन्होंने इस जानिब वज़ीर-ए-आला (मुख्य म‍ंत्री) की तवज्जा ( मेहरबानी,कृपा) मबज़ूल ( आकृष्ट) की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई जिस का नतीजा ये हुआ कि ब्यूरोक्रेट्स हर गुज़रने वाले दिन के साथ ज़िद्दी और अड़ियल होते जा रहे हैं।

उन्होंने इद्दिआ (इच्छा/ दावा) किया कि इन का वज़ीर‍ ए‍ आला ( मुख्य मंत्री) बनने का कोई अरमान नहीं है, लिहाज़ा हुकूमत को गिराने का सवाल ही पैदा नहीं होता। नवीन पटनायक बेफ़िक्र रहें कि उन्हें वज़ारत आला की कुर्सी से महरूम नहीं किया जाएगा।

वो बहैसियत वज़ीर-ए-आला बिलकुल महफ़ूज़ हैं। इनकी गद्दी कोई छीन नहीं सकता, क्योंकि वो बी जे डी क़ाइद हैं। अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि अगर वो वज़ीर-ए-आला बनना चाहते तो बहुत पहले ही बन जाते। इतने साल तक इंतेज़ार नहीं करते।

2009 में भी मेरे वज़ीर-ए-आला बनने के इम्कानात रौशन थे। मिस्टर प्यारे मोहन महापत्रा राज्य सभा एम पी हैं। मिस्टर मोहापत्रा ने मज़ीद ( और भी) वज़ाहत करते हुए कहा कि नवीन पटनायक ने कल बैरून मुल्क से उन्हें काल करके तफ़सीली बात चीत की थी, जहां वो ये जानना चाहते थे कि एम एल अज़ की काबिल लिहाज़ तादाद इन (महापत्रा) के मकान पर क्यों जमा हो रही है? जिस की वज़ाहत ( स्पष्टीकरण) करते हुए मिस्टर महापत्रा ने कहा था कि वो कोई मंसूबा बंद इजलास (शभा) नहीं था बल्कि कुछ पार्टी एम एल अज़ पार्टी उमोर और अपनी दीगर (दूसरी) मुश्किलात पर उन के साथ तबादला-ए-ख़्याल करने आए थे।

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