मैच फिक्सिंग सिर्फ पाकिस्तानी टीम तक महिदूद नहीं: कोनडन

मैच फिक्सिंग सिर्फ पाकिस्तानी टीम तक महिदूद नहीं: कोनडन

लंदन 17 नवंबर (राइटर्स) क्रिकेट से कुरप्शन के ख़ातमे के लिए गुज़श्ता 10 बरस से आई सी सी के साथ काम करने वाले ऐन्टी कुरप्शन ऐंड सैक्योरिटी यूनिट के साबिक़ सरबराह लार्ड पाल कोनडन ने इन्किशाफ़ किया है कि मैच फिक्सिंग सिर्फ पाकिस्तानी टी

लंदन 17 नवंबर (राइटर्स) क्रिकेट से कुरप्शन के ख़ातमे के लिए गुज़श्ता 10 बरस से आई सी सी के साथ काम करने वाले ऐन्टी कुरप्शन ऐंड सैक्योरिटी यूनिट के साबिक़ सरबराह लार्ड पाल कोनडन ने इन्किशाफ़ किया है कि मैच फिक्सिंग सिर्फ पाकिस्तानी टीम तक महिदूद नहीं, बल्कि दुनिया की हर टीम मैच फिक्सिंग करती रही है । उन्हों ने कहा कि सिर्फ पाकिस्तान क़सूरवार नहीं मैच फिक्सिंग की इबतदा-ए-इंगलैंड में हुई थी जहां संडे लीग के मैचिज़ मैं जोह खेला जाता था, अब ये दुनिया भर में फैल चुकी है ।

बर्तानवी अख़बार को इंटरव्यू में कोनडन ने कहा कि क्रिकेट में कुरप्शन कोई नई कहानी नहीं बल्कि 80के दहिय से 2000तक मैच फिक्सिंग क्रिकेट में आम रही और सिर्फ बर्र-ए-सग़ीर या एशियाई टीमें इस में मुलव्विस नहीं रहीं बल्कि दीगर ममालिक की टीमें भी इन से ज़्यादा कुरप्शन करचुकी हैं। इस दौरान हर टीम किसी ना किसी सतह पर मुश्तबा सरगर्मीयों में मसरूफ़ रहे। 80और 90के दहिय में खेलने वाले क्रिकेटरस अच्छी तरह जानते होंगे कि इन के दौर में क्या कुछ होता रहा है । लेकिन इन में से किसी ने इस के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाई। आज जब वो अपने करियर पर नज़र दौड़ाते होंगे तो उन्हें थोड़ी बहुत शर्मिंदगी ज़रूर होती होगी।

90के दहे मैं टेसट मुक़ाबलों और वर्ल्ड कप के मैचिज़ को मुतवातिर फिक्स्ड किया जाता था। 2001 में एक पाकिस्तानी क्रिकेटर को आई सी सी के ख़र्च पर लंदन लाए जो ये दावा कररहा था कि इस के पास कुरप्शन के शवाहिद हैं लेकिन अगर वो उन्हें मंज़र पर लाया तो इस के अफ़राद ख़ानदान को नुक़्सान होसकता है ।

हम ने उसे एक हफ़्ता महफ़ूज़ मुक़ाम पर रख कर पूछगिछ की।तवील अर्से से क्रिकेट में कुरप्शन के ख़ातमा का होश आई सी सी को 2000-ए- में आया जब उन्हों ने आँजहानी जुनूबी अफ़्रीक़ी कप्तान हंसी क्रोनिए को बेनकाब करके ताहयात पाबंदी लगाई। कोनडन ने कहा कि वर्ल्ड कप 2003-ए-के एक ग्रुप मैच में दो खिलाड़ियों ने अचानक सिर्फ़ सिंगल, डबलज़ के ज़रीये रंज़ बनाने शुरू कर दिये। मैंने साबिक़ क्रिकेटरस पर मुश्तमिल क्रिकेटर्ज़ को विडियो दिखाई तो उन्हों ने ये मानने से इनकार कर दिया कि इस में कोई सट्टा बाज़ी की गई है ।

2003ए- के बाद से एसपाट फिक्सिंग क्रिकेट में रच बस गया है क्यों कि ये सब से आसान है । कोई खिलाड़ी एक या दो नव बॉल्ज़ करने के बावजूद मैन आफ़ दी मैच बन सकता है और इस से मैच का नतीजा भी मुतास्सिर नहीं होता इस लिए क्रिकेटर्ज़ इस जानिब तेज़ी से राग़िब हुई। मेरा ख़्याल है कि जब तक क्रिकेट खेली जा रही है एसपाट फिक्सिंग को इस से अलैहदा करना मुम्किन नहीं। उन्हों ने कहा कि जिस तरह बर्तानवी अख़बार के रिपोर्टर ने असटिंग ऑप्रेशन के ज़रीये पाकिस्तानी क्रिकेटरस को बेनकाब क्या, में आई सी सी को 2001-ए-से इस तरह का कोई निज़ाम बनाने का कह रहा था।

कोनडन ने कहा कि मैं नी008 में बोर्ड मीटिंग में आई सी सी को ख़बरदार किया था कि आई पी ईल इंटरनैशनल क्रिकेटरस को गुमराह करसकता है । बेपनाह पैसा देख कर जो खिलाड़ी इस जाल में फंसा इस का टेसट क्रिकेट में वापिस आना नामुमकिन होजाएगा लेकिन इजलास में मौजूद हिंदूस्तानी हुक्काम ने मुझे ये कह कर चुप करादिया कि मुझे इस बारे में बात करने का कोई हक़ नहीं है ।

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