Tuesday , September 18 2018

मॉब लिंचिंग- अफवाहों पर पिछले तीन महीने में गई 20 से ज्यादा लोगों की जानें

असम में तीन दिन पहले हुई एक घटना ने एक बार फिर असहिष्णुता का वह स्याह चेहरा सामने ला दिया है जो दिनोंदिन भयानक होता जा रहा है. एक विवाह समारोह में जब जतिन दास नाम के श्रमिक ने लोगों को पटाखे छोड़ने से रोका तो गुस्साई भीड़ ने उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी.

भारत को स्तब्ध कर देने वाली पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) की घटनाओं में 35 वर्षीय श्रमिक की हत्या का मामला सबसे ताजा है. अब विशेषज्ञ उस सामूहिक क्रोध के बारे में विचार करने पर मजबूर हो गए हैं जो किसी की हत्या की वजह बन जाता है. साथ ही वह आम लोगों में हिंसा के बारे में ‘क्यों और कैसे’ पर भी सोचने लगे हैं.

खबरों के मुताबिक, मई से जुलाई 2018 के बीच भारत के विभिन्न हिस्सों में 14 अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं. हालांकि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) इस तरह के मामलों का अलग से लेखा-जोखा नहीं रखता है, लेकिन भीड़ द्वारा हत्या तथा कानून को अपने हाथ में लेने की घटनाएं बढ़ रही हैं.

दास की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने पटाखे चलाने वालों से इसे बंद करने को कहा था. इसकी वजह यह थी कि उसे एक पटाखा आकर लगा था. उसके इतना कहने भर से भीड़ गुस्से से भर गई. अन्य मामलों में नैतिकता की पहरेदारी इसकी वजह रही, जिसमें भीड़ का ऐसा मानना था कि वह अच्छा काम कर रही है.

 

कुछ मामलों में पीड़ितों के बारे में माना गया कि वे बीफ खाते हैं या गोकशी के धंधे में लिप्त हैं, जबकि अन्य के बारे में माना गया कि वे किडनी के तस्कर हैं. कई मामलों में पीड़ितों को बच्चा चोर होने के संदेह में पीट-पीटकर मारा डाला गया. कानून को अपने हाथों लेकर न्याय करने की घटनाओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन मुख्य कारण आमतौर पर एक ही होता है – वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले संदेशों के कारण अफवाहें फैलना.

मुंबई के एक मनोविज्ञानी हरीश शेट्टी के मुताबिक भारत पोस्ट डिजास्टर सिंड्रोम की स्थिति में है, ऐसे में लोगों में गुस्सा भरा है और उन्हें आसानी से उकसाया जा सकता है.

 

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