मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू

मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू
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केंद्र सरकार ने भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नया कानून बनाने की संभावना पर प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है. इस विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है कि भारतीय दंड संहिता में संशोधन कर ‘भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने’ को दंडात्मक अपराध बनाया जाए. यह जानकारी गुरुवार को सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी.

अधिकारी ने बताया कि एक अन्य विकल्प पर विचार किया जा रहा है कि एक आदर्श कानून तैयार किया जाए जिससे राज्य भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने की घटनाओं पर लगाम लगा सकें. उन्होंने कहा, ‘‘हर चीज प्रारंभिक चरण में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में केंद्र से नया कानून बनाने के मसले पर भी विचार किया जाना है.’’ उन्होंने कहा कि इस पर काफी समय लग सकता है.

सरकार सोशल मीडिया से जुड़े प्रारूप को और मजबूत कर सकती है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि अफवाहों के कारण हो रही इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.

भारत में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की बढ़ती घटनाओं की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए कानून बनाने को कहा था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि ‘‘भीड़तंत्र की इन भयावह गतिविधियों’’ को नया चलन नहीं बनने दिया जा सकता. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चन्द्रचूड़ की पीठ ने भीड़ और कथित गौ-रक्षकों द्वारा की जाने वाली हिंसा से निपटने के लिए ‘‘निरोधक, उपचारात्मक और दंडात्मक प्रावधानों’’ के संबंध में दिशा-निर्देश दिये. पीठ ने कहा कि विधि सम्मत शासन बना रहे यह सुनिश्चित करते हुए समाज में कानून-व्यवस्था कायम रखना राज्यों का काम है.

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