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मोदी की करारी हार, लालू-नीतीश ने फतह किया बिहार

बिहार विधानसभा इंतेखाबात के नतीजो का इंतजार खत्म हुआ, वोटों की गिनती जारी है। इसी के साथ आने लगे हैं नतीजो के रुझान। इब्तिदायी रुझान में बढ़त बनाने वाला भाजपा इ‍त्तेहाद लालू नीतीश के अज़ीम इत्तेहाद से बुरी तरह पिछड़ गयी है और इसके साथ ही साफ हो गया है कि नीतीश कुमार पांचवी मरतबा वज़ीर ए आला की कुर्सी संभालने वाले हैं।

अभी तक मौसूल इत्तेला के मुताबिक सभी सीटों पर आए रुझानों के मुताबिक अज़ीम इत्तेहाद 161 सीटों पर आगे हैं तो भाजपा इत्तेहाद महज 74 सीटों पर ही आगे दिख रही है। खास बात तो ये है कि बिहार में पूरी तरह खत्म बताई जा रही कांग्रेस पार्टी भी 18 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है।

उम्मीदवारो की बात करें तो यादव के सियासी वारिस कहे जा रहे तेजस्वी यादव राघोपुर सीट पर बड़ी जीत की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। जबकि उनके दूसरे बेटे तेज प्रताप भी महुआ में सबसे आगे हैं।

वहीं अभी तक सीट के मामले में आगे चल रही भाजपा अब इस मामले में भी जेडीयू-राजद से पिछड़ती दिख रही है। राजद को 75, जेडीयू को 68 और भाजपा को 61 सीटें मिलती दिख रही हैं। भाजपा इत्तेहाद में लोजपा 5, हम 3 और रोलसपा महज 4 सीटों पर ही आगे है।

दूसरी ओर गया से भाजपा के सीएम ओहदा के दावेदार कहे जा रहे प्रेम कुमार मुसलसल सातवीं मरतबा अपनी सीट बचाते दिख रहे हैं। पटना साहिब से भाजपा उम्‍मीदवार नंद किशोर आगे हैं, अपनी रिवायती सीट मखदूमपुर से साबिक सीएम जीतन राम मांझी आगे हैं।

इसके अलावा नाक की लड़ाई में इमामगंज सीट पर भी वह विधानसभा सदर उदय नारायण चौधरी को हराते दिख रहे हैं।

जमुई से विजय प्रकाश, बेतिया से रेणु देवी (कांग्रेस), शिवहर से लवली आनंद (हम), बेनीपट्टी से विनाद नारायण झा राजद, मधुबनी से समीर कुमार राजद, अररिया से अविदुर रहमान कांग्रेस,नरपत गंज से अनिल यादव राजद, सिकटी से विजय कुमार मंडल भाजपा, हाजीपुर से अवधेश सिंह भाजपा, वैशाली से राज किशोर जेडीयू, बेगूसराय से अमिता भूषण कांग्रेस, तेघरा से वीरेन्द्र यादव राजद, खगडिया से पूनम देवी यादव राजद, भागलपुर से अजीत शर्मा कांग्रेस आगे चल रहे हैं।

वहीं अज़ीम इत्तेहाद के अज़ीम अक्सरियत की ओर आता देख पटना में जश्न का दौर शुरू हो गया है। शुरूआत में भाजपा दफ्तर के बाहर खड़े मीडिया के कैमरे जेडीयू और राजद के दफ्तरों की ओर मुड़ गए हैं। पटना में अज़ीम इत्तेहाद के हामियों ने भी तीन दिन पहले ही दिवाली का जश्न शुरू कर दिया है।

नतीजो से साफ दिख रहा है कि बिहार में लोगों ने मोदी की तरक्की के दावों को एकतरफा कर नीतीश की बेहतरीन हुक्मरानी वाले चेहरे पर ही दोबारा भरोसा जताया है। उनके लिए लालू के जंगलराज से ज्यादा नीतीश की हुक्मरानी और तरक्की का वादा अहम है।

दूसरी ओर वोटिंग के दौरान एक बात और साफ होती दिखी कि भाजपा का तंहा मुज़ाहिरा तो ठीक ठाक रहा लेकिन उसके साथियों से उसे कोई मदद नहीं मिल सकी। जीतन राम मांझी की हम, पासवान की लोजपा और उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी फिसड्डी ही दिखाई दे रहे हैं।

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