मोदी की खातिर मैं गांधी-पटेल को नहीं छोड सकता: थरूर

मोदी की खातिर मैं गांधी-पटेल को नहीं छोड सकता: थरूर
वज़ीर ए आज़म मोदी के स्वच्छता अभियान की तारीफ करने की वजह से पार्टी की मनफी नज़र का शिकार हुए कांग्रेस एमपी शशि थरूर ने हफ्ते के रोज़ महात्मा गांधी को याद करते हुए केरल की दारुल हुकूमत के बाहरी हिस्से में सफाई के प्रोग्राम में हिस्सा ल

वज़ीर ए आज़म मोदी के स्वच्छता अभियान की तारीफ करने की वजह से पार्टी की मनफी नज़र का शिकार हुए कांग्रेस एमपी शशि थरूर ने हफ्ते के रोज़ महात्मा गांधी को याद करते हुए केरल की दारुल हुकूमत के बाहरी हिस्से में सफाई के प्रोग्राम में हिस्सा लिया और कहा कि वह नरेंद्र मोदी के लिए गांधीजी को नहीं छोडेंगे।

उन्होंने कहा कि मुल्क को साफ सुथरा एक क़ौमी मामला है और उनकी तरफ से इसकी हिमायत करने का कोई सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। थरूर ने अपने पार्लीमानी हल्के में यहां साहिली शहर विझिंजम में मुकामी लोगों की तरफ से कचरे की सफाई प्रोग्राम में भागीदारी की।

इसके बाद उन्होंने अपने नाक़दीन को खामोश करवाने की कोशिश प्रयास में कहा, वैसे भी यह कोई बीजेपी की मुहिम नहीं है, मैं मोदी के लिए गांधीजी को नहीं छो़डूंगा, मैं मोदी के लिए (सरदार) पटेल को नहीं छो़डूंगा। बता दें,इस माह के शुरू में रियासत केरल के कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के दबाव में थरूर को All India Congress Committee के तर्जुमान के ओहदा से हटा दिया गया था।

केपीसीसी ने पार्टी कियादत से गुजारिश किया था कि वह मोदी और उनकी स्वच्छ भारत अभियान जैसी पहल की तारीफ करने के लिए थरूर पर पाबंदी लगाएंगे। मुहिम में अपनी सरगर्म भागीदारी का बचाव करते हुए थरूर ने कहा,यह किसी एक सियासी पार्टी का खुसूसी इख्तेयारात नहीं है और अपने आसपास की जगह को साफ रखने का पैगाम पहली बार महात्मा गांधी ने दिया था।

नामानिगारों ने उनसे यह सवाल किया था कि क्या उनके इस कदम को पार्टी की वार्निंग की खिलाफवर्जी की शक्ल में पेश नहीं किया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा, गांधीजी ने कहा था कि साफ सफाई आजादी से भी ज्यादा अहम है। लेकिन गांधी के लिए मन और जिस्म की सफाई भी उतनी ही अहम थी जिसका मतलब है कि दिल से नफरत और तशद्दुद को दूर किया जाए।

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