Thursday , December 14 2017

मोदी के जलसा में तेलंगाना के नाम पर लोगों को लाया गया

चीफ मिनिस्टर गुजरात नरेंद्र मोदी हमारे तारीख़ी शहर आए और चले भी गए उन्हें इस बात की ख़ुशी रही कि उन के जलसा में हज़ारों की तादाद में बी जे पी के हामियों ने शिरकत की और इस तरह जुनूब की इस रियासत में एक अज़ीमुश्शान रैली से उन्हें ख़ित

चीफ मिनिस्टर गुजरात नरेंद्र मोदी हमारे तारीख़ी शहर आए और चले भी गए उन्हें इस बात की ख़ुशी रही कि उन के जलसा में हज़ारों की तादाद में बी जे पी के हामियों ने शिरकत की और इस तरह जुनूब की इस रियासत में एक अज़ीमुश्शान रैली से उन्हें ख़िताब करने का मौक़ा मिला।

मोदी को ख़ुश होने की इस लिए ज़रूरत नहीं है कि फ़तह मैदान के जलसा में शरीक हज़ारों अफ़राद ऐसे भी थे जिन्हें इस बात का इल्म ही नहीं था कि ये जलसा किस मक़सद से और किस के लिए मुनाक़िद किया गया और जलसा को कौन मुख़ातब करने वाला है।

क़ारईन ! राक़िमुल हुरूफ़ दोपहर एक बजे से शाम 6 बजे तक मुसलसल फ़तह मैदान में मौजूद रहते हुए जलसा में शरीक कई मर्द और ख़्वातीन से बात की हमें मोदी के जलसा में चंद बुर्क़ापोश ख़्वातीन और कुर्ता पाजामा ज़ेब तन किए हुए चंद बुज़ुर्ग हज़रात को देख कर भी ताज्जुब नहीं क्यों कि हमें अच्छी तरह पता है कि ये सब कुछ सयासी नौटंकी के लवाज़मात हैं।

हम ने मोदी के जलसा में शरीक जिन लोगों से बात की इन में महबूबनगर से ताल्लुक़ रखने वाले साजिद ( नाम तब्दील) भी शामिल थे । सफेद कुर्ता पाजामा ज़ेब तन किए हुए साजिद सर पर टोपी पहने और सीने पर मोदी की तस्वीर का बैच लगाए बड़े आराम से घूम रहे थे।

एक शख़्स को मोदी के इशक़ में मुबतला देख कर दीगर शुर्का भी हैरान थे लेकिन बात करने पर पता चला कि इन साहिब को उन के गाँव के बाअज़ साथियों ने ये कह कर यहां लाया कि तेलंगाना के मौज़ू पर जलसा हो रहा है चूँकि मुसलमानों ने तेलंगाना की तहरीक में बढ़ चढ़ करे हिस्सा लिया इसी वजह से साजिद सिर्फ़ तेलंगाना के लिए जलसा में शिरकत के लिए आ गए।

इन बेचारों को ये भी पता नहीं नरेंद्र मोदी इस जलसा से ख़िताब करने वाले हैं । फ़तह मैदान स्टेडीयम पहुंचते ही उन के दीगर साथियों ने साजिद के सीने पर भी मोदी की तस्वीर पर मुश्तमिल बैच लगा दिया और वो दोस्ती का लिहाज़ करते हुए इनकार ना कर सके।

जलसा के बाद ज़राए ने बताया कि मुख़्तलिफ़ अज़ला से लोगों को पैसे दे कर शहर लाया गया था । इस बारे में बी जे पी क़ाइदीन ही सही बता सकते हैं । हाँ ये सच है कि शहर के अतराफ़ और अकनाफ़ के कॉलेजेस की बसें लोगों को लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल की गईं ।

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