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मोदी के स्वच्छ अभियान की खुली पोल, भारत के शहर दुनिया के ख़राब शहरों में सबसे आगे: रिपोर्ट

लन्दन: ग्लोबल इनजीओ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत मे सबसे ज़्यादा शहरी लोग हैं जिन्हें सुरक्षित और निजी शौचालयों की सुविधा प्राप्त नहीं हैं और वे खुले मे शौच करते हैं. यह हालात तब हैं जब भारत सरकार के लिए स्वछता सबसे बड़ी प्राथमिकता है. ब्रिटैन मे स्थित एक चैरिटी-वाटरएड के अनुसार “भारत पहले स्थान पर है जहाँ सबसे ज़्यादा शहरियो को सुरक्षित और निजी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं – १५७ लाख – और ४१ लाख शहरी खुले मे शौच करते हैं.

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दुनिया के शौचालयों का दूसरा वार्षिक विश्लेषण ‘वरफ़्लोयिंग सिटीज डी स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड,स टॉयलेट्स २०१६’ वर्ल्ड टॉइलट डे जो की पूर्व संध्या को जारी किया गया. रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों के उच्च जनसंख्या घनत्व का मतलब यह है कि बीमारियों भी तेज़ी से फैलती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार यह समस्या इतनी बड़ी है की दैनिक भारत के कस्बों और शहरों की सड़कों पर उत्पादित कचरा आठ ओलंपिक के स्विमिंग पूल, या पूल के साथ 16 जंबो जेटो को हर दिन भरने के लिए पर्याप्त है.
ध्यान देने की बात है की ग्रामीण इलाको से शहरो की और लोगो का पलायन इस सदी मे सबसे तेज़ी से हो रहा. रिपोर्ट कहती है की आज के भारत मे ३८१ लाख लोग रहते हैं जो तक़रीबन पश्चिमी यूरोप की आबादी के बारबर हैं. इस आबादी मे १५७ लाख लोगो के पास शौच के लिए कोई सभ्य जगह उपलब्ध नहीं है.

हलाकि स्वछता सरकार की प्राथमिक्ता है लेकिन साफ़ शौच के बिना रहने वाले शहरियो की संख्या २००० की तुलना मे २६ लाख से बढ़ गयी है. यह कहना है संस्था का जीसने दुनिया मे ७०० लाख शहरियो की जांच की है जो अस्वच वातावरण मे रह रहे हैं.

एक अनुमान के अनुसार 100 मिलियन शहरियो के पास कोई विकल्प नहीं है, लेकिन खुले किनारे, रेलवे पटरियों और यहां तक कि प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग कर, डब ‘उड़ान शौचालय’ में शौच करने का। वाटरएड के कार्यक्रम और नीति के निदेशक अविनाश कुमार ने कहा कि भारत का अनियोजित शहरीकरण विभिन्न विकासात्मक चुनौतियों को पैदा कर रही है।
वह कहते है “शहरीकरण की मौजूद वृद्धि और बुनियादी जरूरतों की बढ़ती मांग सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक बहुत बड़ी बाधा है ” कुमार ने कहा की शहरी योजनाओ के अन्तर्गत हमे चाहिए की बुनियादी ज़रूरतों जैसे साफ़ पानी, सुरक्षित शौचालय एंड स्थायी मॉल कीचड़ का प्रभंधन जैसी समस्याओ के निवारण में लोगो को भाग लेने में प्रोत्साहि करे.” एहि एक बेहतर विकल्प है जो हमे स्वस्थ और सतत भविस्ये का अवसर देगा ”

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