Thursday , December 14 2017

मोदी को केशव भाई पटेल से ख़तरा ?

अब जबकि गुजरात में भी असेंबली इंतेख़ाबात क़रीब से क़रीबतर होते जा रहे हैं, वहीं वज़ीर-ए-आला ( मुख्य मंत्री) नरेंद्र मोदी के लिए अब की बार मुक़ाबला इतना आसान नहीं होगा जितना कि गुज़श्ता अर्सा ( बीते समय ) में रहा है क्योंकि उनके पेशरू (आगे

अब जबकि गुजरात में भी असेंबली इंतेख़ाबात क़रीब से क़रीबतर होते जा रहे हैं, वहीं वज़ीर-ए-आला ( मुख्य मंत्री) नरेंद्र मोदी के लिए अब की बार मुक़ाबला इतना आसान नहीं होगा जितना कि गुज़श्ता अर्सा ( बीते समय ) में रहा है क्योंकि उनके पेशरू (आगे आने वाले/पथ प्रदर्शक़) और बी जे पी के अहम क़ाइद (मुख्य कार्यकर्ता)केशव भाई पटेल सयासी तौर पर बारसूख पटेल बिरादरी को सयासी तौर पर एक नया रुख देने अभी से सरगर्म हो गए हैं जिस से रियासत में इक़्तेदार (शासन) का तवाज़ुन ( संतुलन) असरअंदाज़ हो सकता है।

याद रहे कि केशव भाई पटेल को मोदी का सब से बड़ा हरीफ़ समझा जाता है और वो गुज़शता 4 सालों से सयासी सरगर्मीयों से दूर रहे हैं लेकिन अब अचानक वो इस सयासी गोशा गुमनामी से बाहर आ रहे नौईयत के इजलास-ओ-तक़ारीब में शिरकत कर रहे हैं। ख़ुसूसी तौर पर ऐसी तक़ारीब जिन का एहतेमाम ( व्यवस्था/इंतेज़ाम) पटेल बिरादरी की जानिब से किया गया हो।

इन तक़ारीब और इजलास में वो मोदी पर खुले आम तन्क़ीद करते हुए मौजूदा हुकूमत की तब्दीली ( बदलने/ परिवर्तन)पर ज़ोर दे रहे हैं। जारीया साल के आग़ाज़ से केशव भाई पटेल जिन्हें गुजरात के वज़ीर-ए-आला के ओहदा ( पद) से 2001में अचानक बर्ख़ास्त करके नरेंद्र मोदी को वज़ीर-ए-आला बनाया गया था, ने अब तक चार अहम सयासी इजलास में शिरकत की है और नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ खुल्लम खुल्ला ज़हर अफ़्शानी की।

यहां इस बात का तज़किरा (ज़िकर/चर्चा) दिलचस्पी से ख़ाली ना होगा कि रियासत में पटेल बिरादरी का तनासुब तक़रीबन 18 फ़ीसद ( प्रतिशत) है और ये तनासुब उस वक़्त सामने आया जब पटेल बिरादरी के रसूख़ को कम करने के लिए कांग्रेस के साबिक़ वज़ीर-ए-आला माधव सिंह सोलंकी ने (KHAM) यानी शत्रिया, हरीजन, अदीवासी (कबायली) और मुस्लिम फार्मूला अपनाया था। रियास्ती इंतेख़ाबात ( चुनाव) में बी जे पी की मुसलसल ( लगातार) कामयाबीयों के पसेपुश्त (पीछे) पटेल बिरादरी का अहम रोल रहा है।

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