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मोदी को क्लीन चिट के ख़िलाफ़ ज़किया जाफरी की एहतिजाजी दरख़ास्त

अहमदाबाद, 16 अप्रैल: (पी टी आई) गुजरात में 2002 के दौरान गोधरा फ़सादाद में महलूक कांग्रेस के साबिक़ रुकन पार्लीयामेंट एहसान जाफरी की बेवा ज़किया जाफरी ने एक मुक़ामी अदालत में एहतिजाजी अपील दायर करते हुए ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम की रिपोर्ट क

अहमदाबाद, 16 अप्रैल: (पी टी आई) गुजरात में 2002 के दौरान गोधरा फ़सादाद में महलूक कांग्रेस के साबिक़ रुकन पार्लीयामेंट एहसान जाफरी की बेवा ज़किया जाफरी ने एक मुक़ामी अदालत में एहतिजाजी अपील दायर करते हुए ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम की रिपोर्ट को मुस्तरद करने की दरख़ास्त की है।

इस रिपोर्ट में गुलबर्ग सोसायटी फ़सादाद के एक मुक़द्दमा में गुजरात में चीफ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी और दूसरों को क्लीन चिट दी गई थी। इस दरख़ास्त में सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से मुक़र्रर करदा ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम (एस आई टी) से हट कर किसी दूसरे आज़ाद इदारे के ज़रीया दुबारा तहकीकात कराने और मोदी के इलावा दूसरों के ख़िलाफ़ चार्ज शीट पेश करने की इस्तिदा की गई है।

मेट्रो पोलीटन मजिस्ट्रेट बी जे गनात्रा ज़किया जाफरी की दरख़ास्त पर 24 अप्रैल से रोज़ाना बुनियाद पर समाअत करेंगे। इस दरख़ास्त में एस आई टी की तहकीकात बंद करने से मुताल्लिक़ रिपोर्ट को मुकम्मल तौर पर मुस्तरद करने की अपील की गई है।

ये रिपोर्ट 8 फरवरी 2012 को इसी अदालत में पेश की गई थी। ज़किया जाफरी ने बिशमोल मोदी तमाम 59 मुल्ज़िमीन के ख़िलाफ़ चार्ज शीट पेश करने की गुज़ारिश की है। ज़किया जाफरी ने एक दरख़ास्त 8 जून 2006 को सुप्रीम कोर्ट में भी पेश की जिस में मोदी को मुल्ज़िम बनाने की अपील की गई थी।

ज़किया जाफरी ने अपने वकील एस एम बोरा के ज़रीया दायर करदा ताज़ा तरीन दरख़ास्त में मेट्रो पोलीटन मजिस्ट्रेट अदालत में इस्तेदा की है कि एक आज़ाद इदारा के ज़रीया तहकीकात करवाई जाये और सी बी आई के साबिक़ डायरेक्टर आर के राघवन की क़ियादत में मुक़र्रर करदा ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम (एस आई टी ) के ज़रीया इस की तहकीकात ना की जाएं।

दरख़ास्त में कहा गया है कि गुलबर्ग सोसायटी का क़त्ल-ए-आम एक इंतिहाई सर्द ख़ूँ साज़िश थी जिस का मक़सद माबाद गोधरा फ़सादाद की संगीनी को कम दिखाना था और मोदी ने अपने काबीनी रफ़क़ा और वी एच पी पी क़ाइदीन के बिशमोल दीगर मुआविन मुल्ज़िमीन के तआवुन से इस साज़िश का मंसूबा बनाया था और उस को रूबा अमल लाया।

514 सफ़हात पर मुश्तमिल ज़किया जाफरी की दरख़ास्त तीन जिल्दों पर मुश्तमिल जदूल और 10 सीडीज़ के साथ अदालत में पेश की गई। उन्होंने अपनी शिकायत में कई ठोस शवाहिद , फ़ोन काल्स की तफ़सीलात , रियासती इंटेलीजेन्स ब्यूरो की रिपोर्टस और पुलिस कंट्रोल रुम अहमदाबाद-ओ-दीगर शहरों के रिकॉर्ड्स पेश किए ।

ज़किया जाफरी की दरख़ास्त में गुलबर्ग सोसायटी तशद्दुद से एक दिन क़ब्ल 27 फरवरी 2002 को नरेंद्र मोदी की रिहायशगाह पर मुनाक़िदा इजलास पर भी तवज्जा मर्कूज़ कराई गई जिस में उन्होंने मुबय्यना तौर पर पुलिस को हिदायत दी थी कि वो हिंदुओं को मुसलमानों के ख़िलाफ़ ब्रहमी-ओ-ग़ुस्सा के इज़हार का मौक़ा दें ।

दरख़ास्त में इस इजलास का हवाला देते हुए कहा गया है कि तशद्दुद की मुजरिमाना साज़िश तैयार की गई थी और इस इजलास की वजह से ही पुलिस और इंतेज़ामीया अपनी दस्तूरी ज़िम्मेदारी को मूसिर तौर पर अदा नहीं कर पाए । बोरा ने कहा कि दरख़ास्त गुज़ार ने इस्तिदलाल ( दलीद) पेश किया है कि एस आई टी के पास तमाम मुल्ज़िमीन के बारे में सही नतीजा अख़ज़ करने के लिए ख़ातिरख़वाह दस्तावेज़ और ब्यानात मौजूद थे।

ताहम इस ने जराइम की पर्दापोशी का फैसला किया और उन्हें (मुल्ज़िमीन को) क्लीन चिट देते हुए अदालत को गुमराह किया। वाज़िह रहे कि कांग्रेस के साबिक़ रुकन पार्लीयामेंट एहसान जाफरी 28 फरवरी 2002 को गुलबर्ग सोसायटी में हुए बदतरीन फ़िर्कावाराना फ़सादाद में हलाक होने वाले 69 अफ़राद में शामिल थे। फ़सादीयों ने एहसान जाफरी को ज़िंदा जला दिया था।

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