Wednesday , December 13 2017

मोदी लहर का असर, 20 साल बाद नीतीश-लालू साथ !

इसे लोकसभा इंतेखाबात के दौरान चली नरेंद्र मोदी की लहर का खौफ कहें या सेक्यूलर ताकतों की मोर्चाबंदी की कोशिश, एक-दूसरे के मुखालिफ लीडर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव तकरीबन 20 साल बाद फिर साथ आ रहे हैं। लालू यादव ने बिहार की जीतनराम

इसे लोकसभा इंतेखाबात के दौरान चली नरेंद्र मोदी की लहर का खौफ कहें या सेक्यूलर ताकतों की मोर्चाबंदी की कोशिश, एक-दूसरे के मुखालिफ लीडर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव तकरीबन 20 साल बाद फिर साथ आ रहे हैं। लालू यादव ने बिहार की जीतनराम मांझी की कियादत में बनी नई हुकूमत को ताईद देने का ऐलान किया है।

जीतनराम मांझी की नई हुकूमत ने एतेमाद हासिल करने के लिए आंइदा 23 मई को बिहार विधानसभा का खुसूसी सेशन बुलाने का फैसला किया है। ऐसे में लालू यादव का यह ऐलान भाजपा के खिलाफ नए सियासी मसावात का इशारा है। गौरतलब है कि लोकसभा इंतेखाबात में मिली करारी हार को देखते हुए नीतीश कुमार ने सीएम के ओहदा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जदयू ने जीतनराम मांझी को एमएलए पार्टी का लीडर चुना और गवर्नर ने उन्हें सीएम ओहदा की हलफ दिलाई।

विधानसभा में जदयू की यह हुकूमत अक्लियत में है और अब इसे बडा सहारा देते हुए अब तक अपोजिशन पार्टी की जिम्मेदारी निभा रही राजद ने उसे बाहर से ताईद देने का ऐलान कर दिया है। राजद विधानसभा में एतेमाद पर वोटिंग के दौरान जदयू का बिना शर्त ताईद ।

नए सीएम जीतन राम मांझी को जुमे के रोज़ बिहार विधानसभा में एतेमेद के वोट हासिल करना है। 243 मेम्बर वाली बिहार विधानसभा में जदयू के पास 115 एमएलए हैं।

इसके अलावा उसे 4 कांग्रेस और 4 निर्दलीय एमएलए का ताईद हासिल है। अब राजद के 21 एमएलए भी जदयू के साथ हैं। अपने इस फैसले का ऐलान करते हुए लालू ने कहा कि फिर्कावाराना ताकतों को इक्तेदार से बाहर रखने के लिए उन्होंने यह फैसला किया है। यह मौकापरस्त नहीं बल्कि भाजपा से लडने का अज़्म है।

क्या यह अज़्म / करारदाद बिहार के विधानसभा इंतेखाबात में भी जारी रहेगा, इस सवाल पर लालू ने कहा कि देखिए और इंतजार कीजिए।

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