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मोदी लहर में बढ़ता गया भगवा रंग, और त्रिपुरा की जीत में काम आ गयी संघ की ट्रेनिंग

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा था कि मैं मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा की जनता को बीजेपी के गुड गवर्नेंस अजेंडे और ‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का समर्थन करने के लिए धन्यवाद देता हूं। त्रिपुरा विजय पर पीएम ने कहा कि यह एक सामान्य चुनावी जीत नहीं है। शून्य से शिखर की इस यात्रा को हमारे संगठन की ताकत और ठोस विकास के अजेंडे ने संभव बनाया। उनकी कही बातें कुछ हद तक सही है। नॉर्थ ईस्ट में संघ के प्रचारक रहे सुनील देवधर कहते है कि त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के पीछे संघ की ट्रेनिंग की अहम भूमिका है। नॉर्थ ईस्ट में संघ के प्रचारक रहे सुनील देवधर ने जब त्रिपुरा की जिम्मेदारी संभाली तो ठीक उसी तरह काम करना शुरू किया जैसा संघ की स्टाइल रही है। वह खुद मानते हैं कि संघ की छोटी-छोटी शाखा से लेकर बड़ा संगठन खड़ा करने की ट्रेनिंग काम आई और उन्होंने उसी स्टाइल में त्रिपुरा में बीजेपी का संगठन खड़ा किया।

त्रिपुरा में मुकाबला लेफ्ट से था जो कि कैडर बेस्ड पार्टी है, इसलिए बीजेपी को भी कैडर तैयार करना जरूरी था। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 50 सीटों में से 49 में अपने कैंडिडेट की जमानत तक नहीं बचा पाई थी। त्रिपुरा में पिछले करीब तीन साल से संघ के पूर्व प्रचारक और अभी बीजेपी के त्रिपुरा प्रभारी सुनील देवधर बीजेपी के लिए जमीन तैयार करने में जुटे थे। संघ के एक सीनियर प्रचारक के मुताबिक संघ का संगठन तैयार करने का तरीका फूलप्रूफ है और वही त्रिपुरा में संघ के पूर्व प्रचारक ने करके दिखा भी दिया।

सुनील देवधर नॉर्थ ईस्ट में दंड (लाठी चलाना) की ट्रेनिंग देते थे। वे दंड की ट्रेनिंग देने से लेकर राजनीति तक की भी ट्रेनिंग देते रहे। देवधर 2002 तक प्रचारक रहे। वह 2014 में लोकसभा चुनाव में बनारस में पीएम मोदी की सीट के इंचार्ज भी रहे। देवधर कहते हैं कि नॉर्थ ईस्ट में प्रचारक रहने के दौरान मैंने यहां के लोगों की दिक्कतों को समझा और जाना कि किस तरह इन्हें दूसरे राज्यों में दिक्कत होती है और तब ‘माई होम इंडिया’ नाम से एक एनजीओ बनाया। इसका मकसद नॉर्थ ईस्ट के लोगों को देश के दूसरे हिस्से में भी अपनापन महसूस हो और मदद मिले, यह था। यह संगठन अभी 65 शहरों में हैं। इस संगठन के जरिए भी देवधर की नॉर्थ ईस्ट में पकड़ मजबूत हुई जिसका फायदा बीजेपी को चुनाव में मिला।

देवधर ने बताया कि बूथ लेवल पर पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए त्रिपुरा में उन्होंने हर महीने के 15 दिन बिताए। जब उनसे त्रिपुरा के अगले सीएम बनने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया, तो देवधर ने इसे खारिज कर दिया। यहां तक कि उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उनसे इस जिम्मेदारी के लिए संपर्क भी करती है, तो वह इनकार कर देंगे।

2013 के दिल्ली चुनाव में देवधर को साउथ दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी। तब बीजेपी यहां 10 में से सात सीटें जीती। 2014 के महाराष्ट्र चुनाव के वक्त अमित शाह नए नए बीजेपी अध्यक्ष बने थे। उन्हें बताया गया कि देवधर मुंबई के हैं इसलिए उन्हें यहां 32 सीटों का चार्ज दिया गया है। तब अमित शाह का जवाब था कि ‘सुनील की मुंबई में क्या जरूरत, इन्हें जंगल भेजो।’ देवधर बताते हैं कि उसके बाद उन्हें पालगढ़ भेजा गया, जहां पूरे महाराष्ट्र में सीपीएम की इकलौती सीट थी। चुनाव में यह सीट बीजेपी के पास आ गई और शाह ने देवधर को त्रिपुरा भेजने की सोची।
प्रदेश प्रभारी सुनील देवधर ने कैडर आधारित वाम मोर्चे को उसी के अंदाज में दिया जवाब

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