Saturday , September 22 2018

मोदी सरकार को इस्लामिक कानून में दखल नहीं देना चाहिए, हम शरीयत को ही अपनायेंगे- मुस्लिम महिलाएं

शरीयत में दखल और तीन तलाक बिल के विरोध में मंगलवार को शहर की मुस्लिम महिलाएं सडक़ पर उतरी और मौन जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर पीर बल्ख मोहल्ले से जुलूस के रूप में रवाना हुई, जो विभिन्न मार्गों से होती हुई समस तालाब पर पीर बल्ख मोहल्ला स्थित मदरसा ईस्लामिया मदीनातुल उलूम पहुंची।

यहां ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिलाओं सहित अन्य महिलाओं ने सरकार की ओर से तीन तलाक को लेकर लाए गए बिल के विरोध में सभा की। महिलाओं ने कहा कि अगर बहुमत से सरकार बन जाती है तो क्या हमारा बहुमत इसके खिलाफ नहीं है।

सभा में जयपुर से आई बोर्ड की अफ्शा तनवीर, रूबीना तथा शादाब अंजुम ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तीन तलाक बिल की धारा-2 के अनुसार एक साथ तीन तलाक नहीं होगा व धारा-3 में तीन साल की सजा का प्रावधान है।

उन्होंने दलील दी कि जब तलाक ही नहीं होगा तो तीन तलाक क्यों? उन्होंने कहा कि तलाक नहीं होगा और शौहर जेल में रहेगा तो बीवी व बच्चों का खर्च कौन चलाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्व में किसी भी समुदाय से जुड़े मुद्दे पर लोगों से राय ली जाती है, जबकि यहां बिल के विरोध में किए गए करीब तीन करोड़ लोगों के हस्ताक्षर नजर अंदाज कर दिए गए।

मुस्लिम समुदाय से बात तक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएं शरीयत को अपनाना चाहती हैं, ऐसे में वें विरोध कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में किसी भी मजहब में छेड़छाड़ की अनुमति नहीं है।

ऐसे में तीन तलाक पर रोक संविधान की भावना का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस्लामिक कानून में दखल अंदाजी नहीं करनी चाहिए। शरीयत का जो कानून है उससे छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सभा के बाद सदस्यों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। महिलाओं ने ज्ञापन में बताया कि मुस्लिम महिला प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज एक्ट 2017 मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है।

लोक सभा में पेश बिल सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त के फैसले के बाद लाना जरूरी नहीं था। शरीयत के कानून में किसी प्रकार से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाए।

मुस्लिम महिलाएं अपने मजहब के साथ रहते हुए खुश है और आजादी पर फक्र महसूस करती है। इस दौरान कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ट के जावेद गौरी, एडवोकेट सैयद दिलशाद इकबाल, मुफ्ती हनीफ कास्मी सहित कई लोग मौजूद थे।

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