Tuesday , December 19 2017

मोदी सरकार ने नहीं दिया बिहार को बकाया 6395 करोड़

पटना। केंद्र ने एक बार फिर बिहार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। राज्य सरकार को उम्मीद थी कि केंद्र इस बार उसके बकाया 6395.19 करोड़ उपलब्ध करा देगा। स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर यह राशि जल्द जारी करने की मांग की थी। लेकिन, केंद्र सरकार ने मात्र 200 करोड़ रुपये ही जारी किये हैं. राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इसे नाकाफी बताया है।

उन्होंने पूरी बकाया राशि जल्द देने की मांग की है. सीएम ने तीन दिसंबर के पहले भी इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) समेत अन्य बकाया राशि देने का अनुरोध किया था। इसके बाद वह 31 मई और फिर 18 सितंबर में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर जल्द पैसे जारी करने का अनुरोध कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने तीन दिसंबर को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में 10वीं, 11वीं व 12वीं पंचवर्षीय योजना की बिहार की लंबित 6395.19 करोड़ रुपये की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने लिखा था कि 2016-17 के आठ माह बीत गये हैं, लेकिन अब तक राशि नहीं दी गयी है, जिसका प्रभाव योजनाओं पर पड़ रहा है। अगर समय पर राशि नहीं मिलती है, तो लागत बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।

केंद्र के पास बिहार के बकाया 6395.19 करोड़ में 10वीं व 11वीं पंचवर्षीय योजना की लंबित परियोजनाओं के 494.34 करोड़ और 12वीं पंचवर्षीय योजना की परियोजनाओं के 4998.77 करोड़ हैं। 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए स्वीकृत राशि में बचे 902.08 करोड़ भी नहीं मिल पाये हैं।

10वीं-11वीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र ने 10520 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की थीं। 11वीं पंचवर्षीय योजना के खत्म होने पर इन परियोजनाओं के लिए 8500 करोड़ ही केंद्र सरकार ने दिये। 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस विशेष सहायता को आगे जारी रखने के लिए बीआरजीएफ के माध्यम से स्पेशल प्लान में 12,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी।

इसमें से 1500 करोड़ लंबित परियोजनाओं और 10,500 करोड़ रुपये नयी परियोजनाओं के लिए रखे गये। इसमें ऊर्जा क्षेत्र की आठ परियोजनाओं के लिए 8308.67 करोड़ रुपये और सड़क परियोजनाओं के लिए 9597.92 करोड़ मंजूर किये गये। राज्य में केंद्र से मिलने वाली राशि के इंतजार में बिजली, सड़क और अन्य विकास की योजनाएं लंबित हैं।

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