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मोदी सरकार ने माना, कुछ राज्यों में है कैश की कमी!

देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत से नोटबंदी जैसे माहौल बन जाने के बाद अब सरकार और रिजर्व बैंक ने लोगों को परेशानी से निजात दिलाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि कैश की किल्लत दो-तीन दिन में दूर हो जाएगी और देश में नकदी की कोई कमी नहीं है।

शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक के पास 1,25,000 करोड़ रुपये की नकदी है। समस्या बस कुछ असमानता की हालत बन जाने की वजह से हुई है।

कुछ राज्यों में कम करेंसी है तो कुछ में ज्यादा. सरकार ने राज्यवार समितियां बनाई हैं और रिजर्व बैंक ने भी अपनी एक कमिटी बनाई है ताकि एक से दूसरे राज्य तक नकदी का ट्रांसफर हो सके। उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक पैसों की राज्यों में असमानता को खत्म कर रहा है। एक राज्य से दूसरे राज्य में पैसे पहुंच रहे हैं।

बिना रिजर्व बैंक के आदेश के ही प्रांतों में स्थ‍िति कैसे ठीक की जा सकती है, इसका अध्ययन कर रहे हैं। पैसे की कोई कमी नहीं है। नोटबंदी की तरह कमी नहीं होने देंगे। हालात ठीक हो जाएंगे।

असमानता के बारे में बताते हुए शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि कुछ राज्य में पैसा ज्यादा चला गया है, कुछ में कम रह गया, लेकिन रिजर्व बैंक से इस बारे में बात हो गई है।

बड़े नोटों की जमाखोरी के शिवराज सिंह के बयान पर शुक्ला ने कहा कि हमने वास्तविक स्थिति आपके सामने रख दी है। कुछ लोगों ने जमा किया होगा। उनकी आदत होगी।

लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ है। हम किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस नहीं कर रहे। दो-तीन दिन की स्थिति है। हम उसको ठीक कर देंगे. हम पांच सौ के पर्याप्त नोट दे रहे हैं।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश न उपलब्ध होने से फिर नोटबंदी जैसी परेशानी का माहौल बनने लगा। लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए आखिरकार रिजर्व बैंक और सरकार को आगे आना पड़ा।

रिजर्व बैंक ने इन राज्यों में नकदी की आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए हैं और उम्मीद जताई है कि जल्दी ही हालात सामान्य हो जाएंगे। रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि कई राज्यों में बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से लोगों को ज्यादा नकदी की जरूरत थी। लोग नकदी का जमावड़ा न करने लगें और अफरा-तफरी न मचे इसके लिए वित्त मंत्रालय ने तत्काल रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और बैंक प्रमुखों से परामर्श भी किया।

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