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मोदी सरकार में देश के वायुसैनिकों के शहीद होने की दर मनमोहन सिंह के कार्यकाल की दर से दोगुनी

लखनऊ : किसी भी देश की आर्मी में उसके वायु सेना का स्थान महत्वपूर्ण होता है। शायद इसीलिए इसको आर्मी का बैक बोन भी कहा जाता है। लेकिन वायु सैनिकों के शहादत पर केंद्र सरकारों का ध्यान नहीं है। लखनऊ के आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने सूचना के अधिकार का प्रयोग वायुसेना के बारे में जो तथ्य हासिल किए हैं वो काफी चौकाने वाले हैं। संजय शर्मा का कहना है कि यह बहुत ही आश्चर्य जनक बात है कि मनमोहन सिंह व नरेद्र मोदी के कार्यकालों की तुलना करें तो वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के वायुसैनिकों के शहीद होने की दर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल की दर से दोगुनी है।

आरटीआई के जवाब में भारत के वायु सेना मुख्यालय ने जो जानकारी दी है उससे यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ष 2017 के शुरुआती 10 महीने में ही पिछले 9 सालों के बराबर यानि कि 1 जनवरी 2008 से 31 दिसम्बर 2016 तक के समय में शहीद हुए वायुसैनिकों के बराबर वायुसैनिक शहीद हो गए हैं। संजय शर्मा ने बीते सितम्बर महीने की 4 तारीख को भारत के रक्षा मंत्रालय में एक आरटीआई अर्जी भेजी थी।

स्थित भारत के वायु सेना मुख्यालय की विंग कमांडर और केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन अधिकारी ने संजय को जो सूचना दी है। उसके अनुसार देश ने साल 2007 में 2, साल 2008 में 1, साल 2013 में 5,
साल 2016 में 1 और चालू साल 2017 के शुरुआती 10 महीनों में 7 वायुसैनिक शहीद हुए। इस सूचना से स्पष्ट है कि साल 2007 से 2013 तक के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंतिम 7 सालों में 8 वायुसैनिक शहीद हुए थे। जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरंभिक साढ़े तीन साल में ही 8 वायुसैनिक शहीद हो गए हैं। इसी आधार पर संजय का कहना है कि अगर वर्तमान व पिछली केंद्र सरकारों के कार्यकालों की तुलना करें तो वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के वायुसैनिकों के शहीद होने की दर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल की दर से दोगुनी है।

एक-एक वायु सैनिक का जीवन अनमोल होता है। इसीलिए संजय ने इन घटनाओं को देश की अपूर्णनीय क्षति बताया और देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वायुसैनिकों के शहीद होने की दर के दोगुना होने के कारणों की खोज करने के लिए जांच कराने और आवश्यक कदम उठाकर अनमोल वायुसैनिकों के शहीद होने की दर को कम करने के आवश्यक उपाय करने की मांग उठाने की बात भी कही है।

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