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मोदी से मुलाकात की कीमत आठ लाख रुपए?

नई दिल्ली, 30 मार्च: गुजरात के वज़ीर ए आला नरेंद्र मोदी और अमेरिकी वफद के बीच हुई मुलाकात पर तनाज़ा खड़ा हो गया है। एक अमेरिकी अखबार हाई इंडिया के मुताबिक, हिंदुस्तान दौरे के लिए अमेरिकी दल से फी शख्स 3 हजार से लेकर 16 हजार डॉलर (1.5 लाख से 8

नई दिल्ली, 30 मार्च: गुजरात के वज़ीर ए आला नरेंद्र मोदी और अमेरिकी वफद के बीच हुई मुलाकात पर तनाज़ा खड़ा हो गया है। एक अमेरिकी अखबार हाई इंडिया के मुताबिक, हिंदुस्तान दौरे के लिए अमेरिकी दल से फी शख्स 3 हजार से लेकर 16 हजार डॉलर (1.5 लाख से 8 लाख रुपए तक) वसूले गए।

इस खबर के सामने आने के बाद बीजेपी बचाव की हालत में आ गई है। बीजेपी (गुजरात) ने इस खबर की तरदीद की है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने हमलावर रुख इख्तियार करते हुए कहा कि मोदी अमेरिकी वीजा पाने को कुछ भी करने को तैयार हैं।

मोदी से जुमेरात को अमेरिकी वफद ने मुलाकात की थी। इसमें चार रिपब्लिकन एमपी भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्गेनाइज़र ने हिंदुस्तानि नस्ल के अमेरिकी कम्युनिटी में इस दौरे के बारे में तशहीर किया था।

यह दौरा एक सयासी कार्रवाई कमेटी (पीएसी), नेशनल इंडियन अमेरिकी पब्लिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एनआईएपीपीआई)की तरफ से स्पांसर है। इसका क़याम शिकागो के कारोबारी शलभ कुमार ने की है। वफद ने मोदी को अमेरिका आने की दावत भी दिए है।

गुजरात कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी से अमेरिकी वफद की मुलाकात को महज ‘मार्केटिंग नौटंकी’ करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के तरजुमान चीफ अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि यह मुलाकात और कुछ नहीं बल्कि मोदी के तशहीर के लिए कुछ आलमी पब्लिक रिलेशन फर्मों की सिर्फ मार्केटिंग हथकंडा है।

मोढवाडिया ने इल्ज़ाम लगाया कि यह वफद ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के जरिए भेजा गया लेकिन ऐसा दिखाया जा रहा है कि मानों यह सरकारी अमेरिकी वफद है और अमेरिकी सरकार ने खुद मोदी को दावत दिया है।

लेकिन हकीकत यह है कि मुसलसल लॉबिंग की कोशिशों के बावजूद न केवल साबिक बल्कि इस वक्त के ओबामा इंतेज़ामिया का मोदी को लेकर पुराने रुख में कोई बदलाव आया है।

बीजेपी ने जुमा को साफ किया कि गुजरात के वज़ीर ए आला नरेंद्र मोदी अमेरिका जाने के लिए बेताब नहीं हैं। पार्टी ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी वीजा को लेकर जारी पाबंदी को हटाने की मांग नहीं की है।

पार्टी तर्जुमान रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एक ओर कुछ मुल्क खून से सने हाथों वाले तानाशाहों को पनाह देते हैं, तो दूसरी ओर तासुब (Bias) के चलते जम्हूरी तरीके से मुंतखिब वज़ीर ए आला को वीजा देने पर ऐतराज जताते हैं।

—-‍‍ बशुक्रिया: अमर उजाला

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