मोब लिंचिंग का शिकार हुए जाहिद को सरकारी बीमा कंपनी ने बताया अपराधी, रकम देने से इनकार किया

मोब लिंचिंग का शिकार हुए जाहिद को सरकारी बीमा कंपनी ने बताया अपराधी, रकम देने से इनकार किया
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त्रिपुरा में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिए गए जाहिद को अपराधी बताकर बीमा  कंपनी ने रकम रकम देने से इनकार कर दिया है। शौहर की मौत से पहले ही सदमे में जी रही जाहिद की पत्नी को बीमा कंपनी के इस रवैये से गहरा धक्का लगा है।

इसी साल 28 जून को त्रिपुरा में बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार दिए गए जाहिद की पत्नी शमा परवीन और अभी इद्दत में हैं। 37 वर्षीय शमा परवीन अब तक ये नहीं समझ पाई हैं कि उनके शौहर को क्यों और कैसे मार दिया गया। अभी वो इस दर्दनाक सच्चाई को समझने की कोशश कर ही रही थीं कि अब उनपर एक और गहरा आघात हुआ है।

शुक्रवार को शमा परवीन के नाम से ओरिएंटल इंशोरियस कंपनी की मुजफ्फरनगर शाखा से एक चिट्ठी आयी है। इस चिट्ठी में जाहिद को अपराधी बताते हुए बीमा की रकम देने से साफ इनकार कर दिया गया है। चिट्ठी में लिखा है, “मृतक की हत्या पब्लिक द्वारा की गई क्योंकि हत्या के समय मृतक अपहरण के प्रयास में अपराध में शामिल था। अतः मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना के तहत हत्या के समय आपराधिक योजना में लिप्त होने के कारण दावा तय नहीं है। पत्रावली बंद की जाती है।”

इंश्योरेंस कंपनीयों पर "ग्राउंड ज़ीरो"

बेक़सूर मॉबलिंचिंग के शिकार हुए ज़ाहिद को क्रिमिनल बताने वाली…इंश्योरेंस कंपनीयों की चालाकियों का होगा पर्दाफाश…देखिए एक रिपोर्ट #ZeeSalaam#ZeeVideo

Posted by Zee Salaam on Saturday, October 20, 2018

त्रिपुरा में भीड़ का शिकार हुए जाहिद के पास 2 बीघा जमीन थी। उत्तर प्रदेश सर्वहित किसान बीमा योजना के तहत किसान की दुर्घटनावश मौत या हत्या होने पर उसके परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है। जाहिद के परिवार ने भी इसी योजना के तहत आवेदन किया था, जिसके जवाब में जाहिद को अपराधी बता दिया गया है।

दिलचस्प बात ये है कि एफआईआर में इसका कोई जिक्र ही नहीं ही है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर अपनी तरफ से दर्ज की थी, जिसमें जाहिद को अपराधी नहीं लिखा गया है। जाहिद की हत्या की जांच कर रहे त्रिपुरा पुलिस के अधिकारी जुगल किशोर का कहना है, “यह एक एकदम गलत बात है। हमने जांच की है और 2 लोग गिरफ्तार हुए हैं। जाहिद यहां फेरी लगाने का काम करता था। उसके किसी अपराध में शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला है। बीमा कंपनी ने हमसे जानकारी मांगी थी और हमने उन्हें लिखकर भेजा था कि जाहिद अपराधी नही था।”

बता दें कि जाहिद के परिवार को हत्या के बाद कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। यूपी सरकार की इस बीमा योजना के तहत परिवार के आवदेन पर स्थानीय तहसील से इसकी जांच हुई थी। सम्भलहेड़ा लेखपाल अमित कुमार द्वारा जांच के बाद दावा सही पाए जाने पर तहसीलदार ने इसकी संस्तुति की थी और पत्रावली बीमा कम्पनी को भेज दी गई थी।

जाहिद की मौत के चार महीने बाद जब उसकी बीवी की इद्दत के 15 दिन बचे हैं, तब यह चिट्ठी आई है। जाहिद की 68 साल की मां शमसीदा बानो कहती हैं, “मेरे बेटे के खिलाफ पूरे हिंदुस्तान के किसी भी थाने में कोई रिपोर्ट हो तो मुझे फांसी पर चढ़ा दो। मदद नही करनी थी तो बता देते, कलंक लगाने की क्या जरुरत थी।” वहीं उसके भाई जावेद का कहना है, “सरकार को हमारी मदद नहीं करनी है, ये बात समझ में आती है, लेकिन ये हमारे जख्मों पर नमक क्यों छिड़क रहे हैं। एक मर चुके आदमी पर लांछन क्यों लगा रहे हैं।”

 

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