मोब लिंचिंग पर पत्र लिखने वाले 49 हस्तियों के खिलाफ याचिका दायर !

मोब लिंचिंग पर पत्र लिखने वाले 49 हस्तियों के खिलाफ याचिका दायर !

देश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यकों के प्रति होने वाली हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने वाले 49 बुद्धिजीवियों के खिलाफ बिहार की एक अदालत में याचिका दायर की गई है. एक वकील ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष याचिका दायर की है.

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, याचिकाकर्ता सुधीर कुमार ओझा ने अभिनेत्री कंगना रनौत और डायरेक्टर मधुर भंडारकर और विवेक अग्निहोत्री का भी जिक्र किया है. इन सभी हस्तियों ने पीएम मोदी को लिखे पत्र का विरोध किया था. ओझा ने आरोप लगाया कि 49 हस्तियों द्वारा पीएम मोदी को पत्र लिखने से देश को छवि को धूमिल हुई है. इसके साथ ओझा ने सभी 49 हस्तियों पर अलगाववादी प्रवृत्ति का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है. इस याचिका पर 3 अगस्त को सुनवाई हो सकती है.

49 हस्तियों का पीएम मोदी को पत्र-

देश में भीड़ हिंसा की बढ़ती संख्या को देख चिंता व्यक्त करते हुए श्याम बेनेगल सहित 49 फिल्मी हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखा था, जिसका अभिनेत्री कंगना रनौत और लेखक-गीतकार प्रसून जोशी सहित 62 हस्तियों ने विरोध किया था. इन 62 हस्तियों ने 49 फिल्मी हस्तियों द्वारा प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखे जाने की निंदा की थी.

इस काउंटर ओपेन लेटर में उन चयनात्मक आक्रोश और कथित झूठे आख्यानों पर सवाल उठाया गया, जिनका प्रचार पहले वाले खत में किया गया था.

इन 62 हस्तियों में सोनल मानसिंह, पंडित विश्व मोहन भट्ट, मधुर भंडारकर, विवेक अग्निहोत्री, अशोक पंडित, पल्लवी जोशी, मनोज जोशी और विश्वजीत चटर्जी जैसे व्यक्तित्व शामिल हैं.

इस पत्र में लिखा गया, “23 जुलाई 2019 को प्रकाशित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक खुले पत्र ने हमें आश्चर्यचकित कर दिया. राष्ट्र और गणतांत्रिक मूल्यों के 49 हस्तियों ने एक बार फिर से चयनात्मक चिंता व्यक्त की है और एक स्पष्ट राजनीतिक पूर्वाग्रहों और मकसद का प्रदर्शन किया है.”

पहले का खुला पत्र लिखने में शामिल 49 हस्तियों में अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन, मणि रत्नम और कोंकणा सेन शर्मा जैसे दिग्गज शामिल थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए इस पत्र में भारत में भीड़ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई थी.

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