Wednesday , September 26 2018

मौलाना सुलेमान सिकन्दर का इंतिक़ाल

ये ख़बर बड़े अफ़सोस के साथ पढ़ी जाएगी कि दक्कन के नामवर शोला बयान मुक़र्रर मौलाना सुलेमान सिकन्दर नायब सदर कल हिंद मजलिस तामीर मिल्लत का अपोलो हॉस्पिटल जुबली हिलज़ में इंतिक़ाल होगया । उन की उम्र 84 साल थी ।

ये ख़बर बड़े अफ़सोस के साथ पढ़ी जाएगी कि दक्कन के नामवर शोला बयान मुक़र्रर मौलाना सुलेमान सिकन्दर नायब सदर कल हिंद मजलिस तामीर मिल्लत का अपोलो हॉस्पिटल जुबली हिलज़ में इंतिक़ाल होगया । उन की उम्र 84 साल थी ।

मौलाना सुलेमान सिकन्दर को मौलाना हमीद उद्दीन आक़िल हसामी की रहलत के बाद मुस्लिम यूनाइटेड फ़ोर्म का मुत्तफ़िक़ा तौर पर सदर नशीन मुंतख़ब किया गया । मौलाना ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के तासीसी रुकन थे । मौलाना सुलेमान सिकन्दर तक़रीबन दो माह से अलील थे ।

रियासत आंध्र प्रदेश के अलावा हिन्दुस्तान भर और बैरून-ए-मुमालिक में मुनाक़िदा इजतेमाआत और आम जलसों में अपने वलवला अंगेज़ ख़ताबात के ज़रीये मौलाना सुलेमान सिकन्दर ने मिल्लत-ए-इस्लामीया के दिलों में हरारत पैदा की ।खासतौर पर सुकूत हैदराबाद (पुलिस एक्शण )के बाद मुसलमानान दक्कन में नया अज़म और हौसला पैदा करने में मौलाना सुलेमान सिकन्दर की ख़िताबत का बड़ा अहम हिस्सा रहा ।

सदर-ओ-बानी मजलिस तामीर मिल्लत मौलवी सयद ख़लील-उल्लाह हुसैनी (मरहूम) की तहरीक पर मौलाना सुलेमान सिकन्दर ने तामीर मिल्लत में शमूलीयत इख़तियार की थी वो ख़लील मरहूम के क़रीबतर साथी थे और उन की ही मयत में मुसलमानों की ख़िदमत का बेड़ा उठाया । एक मरहला पर मौलाना ख़लील-उल्लाह हुसैनी की तहरीक मौलाना सुलेमान सिकन्दर ने अपनी सरकारी मुलाज़मत तक तर्क करदी और मिल्लत की ख़िदमात अंजाम दी।

मौलाना को कई बार ज़बान बंदी और एमरजैंसी के दौर में जेल की सऊबतें बर्दाश्त करनी पड़ें । मुसलमानों में मिली-ओ-सयासी शऊर को बेदार करने में मौलाना सुलेमान सिकन्दर का गिरांक़द्र हिस्सा है जिस को फ़रामोश नहीं किया जा सकता । पसमानदगान में अहलिया के अलावा 4 फर्ज़ान्दन और 9 दुख़तरअन शामिल हैं । नमाज़ जनाज़ा बाद नमाज़ अस्र मस्जिद दरगाह हज़रत अहमद बादपा , अहमद नगर (फ़रस्ट लांसरज़) में अदा की गई ।

मौलाना के बड़े फ़र्ज़ंद जावेद सिकन्दर ने इमामत की बादअज़ां क़ब्रिस्तान मुत्तसिल दरगाह हज़रत अहमद बादपा अहमद नगर में तदफ़ीन अमल में आई ।

मज़हबी सयासी-ओ-समाजी तंज़ीमों के क़ाइदीन और कारकुनों की कसीर तादाद शरीक थी । मौलाना मरहूम ,सीनीयर सहाफ़ी मुहम्मद ताहिर ओमानी के बहनोई और हाफ़िज़ मुहम्मद आदम शीराज़ी सदर ग्लोबल इंस्टीटियूट आफ़ इस्लामिक स्टेडीयम के ख़ुसर थे ।

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