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म्यांमार के रखाइन क्षेत्र में फिर से रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए मदद करेगा भारत

नई दिल्ली। म्यांमार में भारत रोहिंग्या मुसलमानों को फिर से बसने के लिए मदद करेगा। दूसरी तरफ घरेलू राजनीति में रोहिंग्या मुद्दा। इन दोनों के बीच तालमेल बनाते हुए भारत ने रोहिंग्या मुस्लिमों के वापस घर लौटने में म्यांमार सरकार को मदद देने के लिए हाथ बढ़ाया है।

भारत और म्यांमार के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत रखाईन प्रांत के सामाजिक विकास और वहां शांति स्थापित करने में मदद की जाएगी। रखाईन प्रांत में ही हिंसा की वजह से लाखों रोहिंग्याई मुस्लिम बांग्लादेश समेत दूसरे देशों में शरण लिये हुए हैं।

भारत इनकी वापसी को सुविधाजनक बनाने के लिए रखाईन प्रांत में आवास का भी निर्माण करेगा। म्यांमार की यात्रा पर गये विदेश सचिव एस जयशंकर ने इस संदर्भ में बुधवार को एक समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किया है। म्यांमार के समाजिक विकास मंत्री यू सो आंग ने हस्ताक्षर किया है।

यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने रोहिंग्याई मुस्लिमों को मदद दी हो। इसके पहले भारत ने वहां से पलायन कर बांग्लादेश में आये रोहिंग्याई मुस्लिमों के लिए भारी पैमाने पर मदद भेजी थी।

भारत की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद से रखाईन प्रांत में आवास का निर्माण भी किया जाएगा। सनद रहे कि इसी प्रांत में पिछले कुछ दिनों से जातीय हिंसा जारी जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर रोहिंग्याई मुस्लिमों ने बांग्लादेश समेत दूसरे देशों में पनाह ली हुई है।

अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों का कहना है कि म्यांमार की सरकार वहां पर हिंसा रोकने में पूरी तरह से असफल रही है। परोक्ष तौर पर ये देश आन सान सू की सरकार को भी दोषी मान रहे हैं और दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।

हालांकि भारत काफी सोच समझ कर कदम बढ़ा रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि पड़ोसी देश चीन म्यांमार के साथ खड़ा है। चीन ने म्यांमार को नए सिरे से बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद व ढ़ांचागत विकास में मदद देने की पेशकश की है।

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