Wednesday , November 22 2017
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म्यांमार: रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा ‘नरसंहार’, इसे तुरंत बंद होना चाहिए: मलेशिया

An internally displaced Rohingya woman holds her newborn baby surrounded by children in the foreground of makeshift tents at a camp for Rohingya people in Sittwe, northwestern Rakhine State, Myanmar. Authorities in Myanmar's western Rakhine state have imposed a two-child limit for Muslim Rohingya families, a policy that does not apply to Buddhists in the area and comes amid accusations of ethnic cleansing in the aftermath of sectarian violence. (AP Photo/Gemunu Amarasinghe)

कुआलालंपुर। मलेशिया ने म्यांमार की रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यक के खिलाफ हिंसा को ‘नरसंहार’ की संज्ञा दी है। वहां प्रधानमंत्री नजीब रजाक के नेतृत्व में गठबंधन मार्च निकालने वाला है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार उनका कड़े शब्दों में बयान उस समय आया है जब कल म्यांमार ने कहा कि मलेशिया को हमारी सवंत्रता का सम्मान करना चाहिए और ” आसियान” की भी यही नीति है कि दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे। मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि तथ्य यह है कि केवल एक विशेष जाति के लोगों को निकाल बाहर किया जा रहा है जो जातीय सफाई की परिभाषा में आता है। यह सब बंद होना चाहिए और तुरंत बंद होना चाहिए ताकि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता वापस लाया जा सके।
मुस्लिम बहुल मलेशिया म्यांमार की ओर से राज्य में रहने वाले मुसलमानों पर अत्याचार और दुर्व्यवहार पर आलोचना करता रहता है। वहां हिंसा से बचने के लिए सैकड़ों लोग जान बचाकर बांग्लादेश भाग गए हैं। वे सुरक्षा बलों पर अत्याचार करने का आरोप लगाते हैं। 2012 में भी वहां सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं जिसमें सैकड़ों लोग जिसमें अधिकांश मुसलमान मारे गए थे उस के बाद यह सबसे गंभीर रक्तपात है। पिछले चार साल में उत्पीड़न और गरीबी के कारण हजारों रोहिंग्या अपना घर बार छोड़कर अपना वतन भी छोड़ गए हैं और इधर उधर जाकर शरण ली है। उस समय यहां बौद्ध और मुसलमानों के बीच बहुत ज्यादा हिंसा हुई थी। बहुत से लोगों को गुलाम की तरह थाईलैंड मलेशिया और अन्य देशों में तस्करी कर दिया गया था।
मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि रोहिंग्या समस्या मलेशिया की अपनी सुरक्षा के लिये खतरा है तथा कहा कि मलेशिया और अन्य पड़ोसी देशों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी ने इसे ” अन्तर्राष्ट्रीय मामला ” बना दिया है। पिछले सप्ताह मलेशिया ने म्यांमार के राजदूत को तलब किया था। उसने विरोध में म्यांमार के साथ होने वाला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का दोस्ताना मैच भी रद्द कर दिया था। नजीब के नेतृत्व में वरिष्ठ सरकारी नेता भी रविवार को सहयोगी मार्च में भाग लेने वाले हैं।

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