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मग़रिब की दोगली पॉलीसी पर इमाम ए काबा की तन्क़ीद ( समीक्षा)

मक्का मुअज़्ज़मा, २३ सितंबर : ( एजेंसी ) इमाम ए काबा-ओ-ख़तीब शेख सालिह अल तालिब (Sheikh Salih Aal Talib ) ने हुज़ूर अक़्दस ( स०अ०व०) की शान में गुस्ताख़ी के वाक़ियात पर मग़रिबी ममालिक की ख़ामोशी की मुज़म्मत ( निंदा) करते हुए कहा कि इनकी ये हरकत गैर मुंसिफ़ाना (

मक्का मुअज़्ज़मा, २३ सितंबर : ( एजेंसी ) इमाम ए काबा-ओ-ख़तीब शेख सालिह अल तालिब (Sheikh Salih Aal Talib ) ने हुज़ूर अक़्दस ( स०अ०व०) की शान में गुस्ताख़ी के वाक़ियात पर मग़रिबी ममालिक की ख़ामोशी की मुज़म्मत ( निंदा) करते हुए कहा कि इनकी ये हरकत गैर मुंसिफ़ाना ( अन्यायपूर्ण) और दोगली पॉलीसी का मज़हर (प्रकट करता) है ।

ये ममालिक इज़हार ख़्याल की आज़ादी का मतलब मुख़्तलिफ़ निकालते हैं जब इसी इज़हार ए ख़्याल के ताबे ( फरमा बरदार) लोग यहूदीयों के क़त्ल-ए-आम की तरदीद करते हैं तो ये ममालिक उन अफ़राद का तआक़ुब (पीछा) कर के उन्हें सज़ा देने की कोशिश करते हैं ।

हुज़ूर स०अ०व० की शान में गुस्ताखाना हरकत करने वालों को खुली छूट दी जाती है । शेख सालिह अल तालिब ने मुसलमानों को मग़रिबी साज़िश से चौकन्ना रहने का मश्वरा देते हुए कहा कि वो गुस्ताखाना कार्यवाईयों पर जज़बात का इज़हार करने के लिये तशद्दुद का रास्ता इख़तियार ना करें ।

नफ़रत फैलाने और दिला ज़ारी करने (दिल दुखाने ) वाले अनासिर ( मूल्य तथ्य) इस्लाम के ख़िलाफ़ मुनज़्ज़म ( संगठित) साज़िश में मुलव्वस (मिले) हैं ।

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