Thursday , December 14 2017

मग़्विया रुकन असेंबली की 34 दिन बाद रिहाई

बाएं बाज़ू के इंतेहापसंदों ने हुक्मराँ बीजू जनता दल के रुकन असेंबली झीना हक्काका को 34 दिनों तक अपनी तहवील में रखने के बाद आज कोरापुट ज़िला में नारायण पटना बलॉक के तहत बाली पेटा गांव में आज़ाद कर दिया। गुज़श्ता 27 मार्च की रात को नौजवान

बाएं बाज़ू के इंतेहापसंदों ने हुक्मराँ बीजू जनता दल के रुकन असेंबली झीना हक्काका को 34 दिनों तक अपनी तहवील में रखने के बाद आज कोरापुट ज़िला में नारायण पटना बलॉक के तहत बाली पेटा गांव में आज़ाद कर दिया। गुज़श्ता 27 मार्च की रात को नौजवान क़बाइली मेम्बर असेंबली के अग़वा की ज़िम्मेदारी लेने वाले बाएं बाज़ू की इंतेहापसंद तंज़ीम आंधरा ‍ उड़ीसा बॉर्डर स्पेशल ज़ोनल कमेटी ने कल ऐलान किया था कि वो मिस्टर हक्काका को उनकी बीवी कौशल्या और कोरापुट के वकील निहार रंजन पटनायक के हवाले कर देंगे।

माऒवादिओ ने बाली पेटा गांव में मीडीया की मौजूदगी में मिस्टर हक्काका को आज़ाद कर दिया। इस मौक़ा पर इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडीया के मुतअद्दिद सहाफ़ी आज सुबह से ही बाली पेटा में मौजूद थे। ये इलाक़ा माओनवाज़ों का गढ़ समझा जाता है। ए ओ बी एस जेड सी ने दावे किया है कि क़बाइली मेम्बर असेंबली को एक अवामी अदालत के सामने लक्ष्मीपुर असेंबली हलक़ा से अपनी रुकनीयत से इस्तीफ़ा देने के बाद ही आज़ाद किया गया है।

माओनवाज़ों की तरफ़ से क़ायम की जाने वाली इस अवामी अदालत में 24 मार्च को हक्काका ने एतराफ़ किया था कि नवीन पटनायक हुकूमत उन के हलक़े में तरक़्क़ीयाती काम करवाने में नाकाम रही है। माओनवाज़ लीडर और ना के मुताबिक़ अवामी अदालत ने नारायण पटना की मौजूदा सूरत-ए-हाल, ऑप्रेशन ग्रीन हंट, पुलिस की कार्रवाई , पुलिस की ज़्यादती और बेगुनाह लोगों पर मज़ालिम जैसे उमूर पर तबादला ख़्याल किया गया।

अवामी अदालत में मौजूद लोगों ने कहा कि मुक़ामी मेम्बर असेंबली की हैसियत से हक्काका अपनी हुकूमत की इन कार्यवाईयों को रुकवाने में नाकाम साबित हुए हैं।

माओनवाज़ लीडर ने कहा कि हक्काका ने अपनी नाकामी और बेबसी का एतराफ़ करते हुए कहा कि नवीन पटनायक हुकूमत उन की रिहाई के लिए कोई ठोस क़दम इस लिए नहीं उठा रही है क्योंकि वो एक क़बाइली हैं। ज़राए ने बताया कि बी जे डी के मेम्बर असेंबली हक्काका अपने वायदे के मुताबिक़ जल्द ही अपना इस्तीफ़ा नामा उड़ीसा असेंबली के स्पीकर पी के अमीत और वज़ीर-ए-आला नवीन पटनायक को पेश कर देंगे।

जिस वक़्त हक्काका को आज़ाद किया गया वो अपनी बीवी से मिल कर फूट फूट कर रो पड़े। उन्होंने मीडीया से ज़्यादा बात नहीं की और कहा कि वो काफ़ी थके हुए हैं। इसके बाद वो कार में रवाना हो गए। ख़्याल है कि हक्काका को 23 मार्च की रात को माऒवादिओं ने उस वक़्त अग़वा कर लिया था जब वो अपनी पार्टी की एक मीटिंग में शिरकत के बाद घर लौट रहे थे।

माओनवाज़ों ने 30 क़ैदीयों की रिहाई के बदले उन्हें रिहा करने के लिए 10 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया था ताहम बाद में इस में तौसीअ करके मुद्दत 18 अप्रैल तक बढ़ा दी। माओनवाज़ों ने रिहा किए जाने वाले क़ैदीयों में से छेदा भोशम उर्फ़ घासी का नाम भी निकाल दिया था जिस के ख़िलाफ़ उड़ीसा और आंधरा प्रदेश में मुतअद्दिद मुक़द्दमात दर्ज हैं।

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