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मज़हब कि तब्दीली पर हंगामा: क्या कहता है संविधान?

मज़हब की तब्दीली पर पार्लियामेंट में हंगामे के बाद हुकूमत ने भले ही चर्चा की और वो कानून बनाने के लिए तैयार है लेकिन हकीकत ये है कि मुल्क की आईन मज़हब को लेकर शहरियों को बुनियादी हुकूक देता है| क्या कहता है संविधान?

मज़हब की तब्दीली पर पार्लियामेंट में हंगामे के बाद हुकूमत ने भले ही चर्चा की और वो कानून बनाने के लिए तैयार है लेकिन हकीकत ये है कि मुल्क की आईन मज़हब को लेकर शहरियों को बुनियादी हुकूक देता है|

क्या कहता है संविधान?

आईन के आर्टिकल 25 में मज़हब चुनने और उसकी तश्हीर करने का हक है| सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तशरीह में साफ किया है कि आईन (संविधान) में किसी शख्स का मज़हब तब्दील कराने के हुकूक की गारंटी नहीं है| यह सभी को अपने ज़मीर का इस्तेमाल करने की आज़ादी की खिलाफवर्जी करता है|

आईन की दफा 295 ए के तहत जबरन मज़हब तब्दीली यानी धोखे से, लालच देकर या डरा धमकाकर करवाने पर एक साल की सजा हो सकती है| अब जबकि सरकार मज़हब की तब्दीली को लेकर सख्त कानून की वकालत कर रही है, कानून के जानकार इसे आईन के बुनियादी हुकूक के खिलाफ बता रहे हैं|

जिस मज़हब की तब्दीली को लेकर बवाल हो रहा है वहां इसको लेकर अलग से कानून नहीं है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान की बीजेपी सरकारों की तरफ से सख्त बिल विधानसभा से पास किए गए हैं लेकिन वह भी अभी सदर जम्हूरिया के पास ज़ेर ए गौर हैं. हैरानी का बात है कि ये सारे कानून कहते हैं कि अगर कोई अपने असल मज़हब में लौटना चाहे तो उस पर यह कानून लागू नहीं होगा .

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