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मज़हब की बुनियाद पर तालीमी फ़वाइद ( फायदे) दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी

अहमदाबाद, ०९ अक्टूबर ( पी टी आई ) गुजरात हाइकोर्ट ने आज कहा कि हुकूमत किसी तबक़ा को मज़हब की बुनियाद पर माली फ़वाइद ( फायदे) नहीं दे सकती ऐसा कोई भी इक़दाम ( कार्य/ Performance) दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी है जो मज़हबी बुनियाद पर इमतियाज़ ( खासियत/ विवेक)

अहमदाबाद, ०९ अक्टूबर ( पी टी आई ) गुजरात हाइकोर्ट ने आज कहा कि हुकूमत किसी तबक़ा को मज़हब की बुनियाद पर माली फ़वाइद ( फायदे) नहीं दे सकती ऐसा कोई भी इक़दाम ( कार्य/ Performance) दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी है जो मज़हबी बुनियाद पर इमतियाज़ ( खासियत/ विवेक) पर इमतिना आइद ( प्रतिबंध/ रोक लगाना) करता है ।

चीफ़ जस्टिस भास्कर भट्टाचार्य और जस्टिस जे बी पारदी वाला पर मुश्तमिल ( सम्मिलित) एक डीवीजन बंच ने ये तब्सिरा ( वार्तालाप) एक दरख़ास्त मफ़ाद-ए-आम्मा ( जन कल्याण) की समाअत ( सुनवायी) के बाद किया । दरख़ास्त में हुकूमत गुजरात को हिदायत देने की गुज़ारिश की गई थी कि वो मर्कज़ की ज़ेर सरपरस्ती प्री मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम जिस का आग़ाज़ ( शुरुआत) मुल्क गीर सतह पर 2008 में हो चुका है नाफ़िज़ (लागू) करे ।

दरख़ास्त मफ़ाद-ए-आम्मा कुछ के कांग्रेसी लीडर आदम चाकी ने दाख़िल की थी ताहम ( यद्वपि) बंच ने कोई हिदायत देने से गुरेज़ किया क्योंकि ये मुतनाज़ा ( विवाद) नुक़्ता-ए-नज़र हाइकोर्ट की एक और डीवीजन बंच ने इसी किस्म की दरख़ास्त पर क़ब्लअज़ीं (इससे पहले) इख़तियार किया था ।

इस के बजाय डीवीजन बंच ने दरख़ास्त मफ़ाद-ए-आम्मा में उठाए गए मसाइल ( समस्या) एक वसीअ तर (उच्च स्तर के) बंच के सपुर्द कर दिए जो फ़ैसला करेगी कि क्या अक़ल्लीयती तबक़ात (अल्पसंख्यको) के तलबा (छात्रों) के लिए प्री मैट्रिक स्कालरशिप्स की स्कीम दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी है और क्या हाइकोर्ट रियास्ती हुकूमत को स्कीम नाफ़िज़ ( ज़ारी करने) करने का हुक्म दे सकती है ।

डीवीजन बंच ने कहाकि माली मुफ़ादात ( फायदे) मज़हब की बुनियाद पर अता करने की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती । मर्कज़ी स्कीम का हदफ़ ( लक्ष्य/ निशाना) मज़हबी अक़ल्लीयतों (अल्पसंख्यको) से ताल्लुक़ रखने वाले प्री मैट्रिक तलबा हैं जिन के वालदैन की सालाना आमदनी एक लाख रुपये से कम है ।

स्कीम के तहत मर्कज़ स्कालरशिप्स की रक़म का 75फ़ीसद ( %) अदा करता है और बाक़ी रियास्ती हुकूमत को बर्दाश्त करना होता है ।हुकूमत गुजरात ने स्कीम नाफ़िज़ ( ज़ारी) करने से ये कहते हुए इनकार करदिया था कि नौईयत (विशेषताओं/ खासियतों) ) के एतबार से ये फ़र्क़ और इमतियाज़ ( विवेक) पर मबनी ( आधारित) है ।

हुकूमत ने मज़ीद (और ये भी) कहा कि वो तमाम तबक़ात के ग़रीब तलबा ( छात्रों) को स्कालरशिप्स फ़राहम कर रही है । 2010 में एक डीवीजन बंच ने मर्कज़ की माली स्कीम बराए अक़ल्लीयती बहबूद ( अल्पसंख्यको के कल्याण/ भलाई के लिए) की मंज़ूरी दी थी ।

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