Wednesday , July 18 2018

यमन में बच्चे गंभीर मानवीय जरूरतों का सामना कर रहें हैं: यूनिसेफ

अम्मान: यमन में पिछले तीन सालों से जारी युद्ध और दशकों से गंभीर रूप से बाधित विकास के परिणामस्वरूप 1.10 करोड़ बच्चे कुपोषण व बीमारी से ग्रस्त हैं। यूनिसेफ के मुताबिक वे गंभीर मानवीय जरूरतों का सामना कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, उत्तर अफ्रीका और मध्यपूर्व के लिए यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक, गीर्ट कैपेलेयर ने रविवार को कहा कि अकेले सिर्फ 2017 में यमन में कम से कम पांच बच्चे प्रतिदिन के हिसाब से मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए।

हैजा और डिप्थीरिया के प्रकोप ने सैकड़ों जिंदगियां छीन ली हैं।

कैपेलेयर ने संवाददाताओं को बताया, “यमन के हालात पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है। इसे सही तौर पर विश्व के सबसे खराब मानवीय संकट के रूप में देखा गया है।”

मध्यपूर्व में यमन सबसे गरीब देशों में से एक है। देश 2015 से गृहयुद्ध से जूझ रहा है। 2015 में लंबे समय से राष्ट्रपति रहे अली अब्दुल्ला सालेह को अपने उपराष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता सौंपनी थी, लेकिन तभी देश में क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हो गया।

कैपेलेयर ने कहा, “यह कहना सही होगा कि आज यमन में प्रत्येक लड़की और लड़का गंभीर मानवीय जरूरतों का सामना कर रहा है। युद्ध और विकास के अभाव ने बच्चों के लिए दुर्भाग्यवश कुछ अच्छा नहीं किया।”

अधिकारी ने कहा कि 2015 में दो लाख बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे थे। यह विश्व में अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। कैपेलेयर के मुताबिक, तब से लेकर अबतक तीन सालों में यह संख्या दोगुनी हो गई है।

युद्ध ग्रस्त देश में खराब मानवीय हालात के बारे में बताते हुए कैपेलेयर ने कहा कि यमन के करीब 20 लाख बच्चे शिक्षा से वंचित हो चुके हैं। बड़ी संख्या में लड़कियों को कम उम्र में शादी के लिए मजबूर किया गया, जिसमें से 75 फीसदी 18 से कम उम्र की थीं और 15 साल से बड़ी थीं।

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