Saturday , September 22 2018

यरुशलम: अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब UN में अकेला छोड़ दिया गया- निक्की हेली

संयुक्त राष्ट्र। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उन देशों की सहायता रोकने की धमकी दी थी जो संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के खिलाफ जाने वाले थे. हालांकि इसकी परवाह किए बगैर संयुक्त राष्ट्र में सदस्य देशों ने भारी संख्या में प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया.

संयुक्त राष्ट्र में इस वक्त अमेरिका इस मुद्दे पर अकेला पड़ गया. भारत ने भी इसमें उसका साथ नहीं दिया और प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया.

भारत के रुख को लेकर कई मुस्लिम देशों में थोड़ी बेचैनी थी, क्योंकि वोटिंग से पहले भारत ने इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया था. कई मुस्लिम देशों के राजदूतों ने भारत सरकार से इस मामले में अपना रुख साफ करने की मांग की थी.

अमेरिका के पश्चिमी सहयोगियों के साथ ही अरब देशों ने भी उसके खिलाफ जाने का फैसला किया. इनमें मिस्र, जॉर्डन और इराक जैसे देश भी शामिल हैं जिन्हें अमेरिका से हर साल भारी रकम सहायता में मिलती है. 21 देश इस दौरान अनुपस्थित रहे.

वोटिंग में 35 देशों ने हिस्सा नहीं लिया. इनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, चेक रिपब्लिक, हंगरी, मेक्सिकी, फिलीपींस, पोलैंड, रवांडा, दक्षिणी सूडान और यूगांडा है.

हालांकि इनमें से कई देशों ने यह भी कहा है कि वे अमेरिकी कदम के साथ नहीं हैं लेकिन इसलिए वोटिंग में शामिल नहीं हो रहे क्योंकि इस प्रस्ताव से परिस्थिति में कोई बड़ा फर्क नहीं आएगा.

प्रस्ताव का विरोध करने वाले 9 देशों में अमेरिका और इस्राएल के अलावा ग्वाटेमाला, होंडुरास, मार्शल आइलैंड्स, मिक्रोनेशिया, नाउरु, पलाउ और टोगो शामिल हैं.

वोटिंग के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा, “अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब आमसभा में उसे अपने संप्रभु राष्ट्र के अधिकार का उपयोग करने के लिए अकेला और हमले का शिकार बनने के लिए छोड़ दिया गया.”

निक्की हेली ने यह भी कहा, “हम इसे तब याद रखेंगे जब हमसे फिर संयुक्त राष्ट्र के लिए सबसे ज्यादा सहयोद दने की बात होगी और तब भी जब बहुत सारे देश हमसे और ज्यादा पैसा देने या फिर अपने प्रभाव का इस्तेमाल उनके फायदे के लिए करने को कहेंगे.”

बाद में निक्की हेली ने उन 64 देशों का आभार जताया जिन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया या फिर वोटिंग या आम सभा में शामिल नहीं हुए.

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