Wednesday , July 18 2018

यरुशलम को बचाने के लिए मुस्लिम देशों ने नहीं चलने दिया अमेरिका की धौंसपट्टी

संयुक्त राष्ट्र ने डॉनल्ड ट्रंप को जता दिया है कि यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने का अमेरिकी फैसला उसे मंज़ूर नहीं है। इस मुद्दे पर हुई वोटिंग में तकरीबन पूरी दुनिया अमेरिका और इजरायल के खिलाफ खड़ी हुई और यरुशलम के बहाने यूएन की प्रासंगिकता एक बार फिर रेखांकित हुई।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उस प्रस्ताव को भारी समर्थन से पारित कर दिया, जिसमें यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा रद्द करने की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव के समर्थन में 128 देशों ने मतदान किया, 35 देश मतदान से बाहर रहे और मात्र 9 वोट इसके विरोध में पड़े।

इस मामले में अमेरिकी धौंसपट्टी बिल्कुल नहीं चली। ट्रंप ने वोटिंग से पहले प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले देशों की आर्थिक मदद रोक देने की धमकी दी थी लेकिन अमेरिका के कई सहयोगियों और मित्रों ने भी इस मसले पर उसका साथ नहीं दिया, जिनमें एक भारत भी है। इजरायल से मित्रता का नया दौर शुरू होने के बावजूद भारत ने इस प्रस्ताव के समर्थन में, यानी अमेरिकी फैसले के खिलाफ मतदान किया।

पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के बीच रक्षा और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है लेकिन भारत अमेरिका का पिछलग्गू नहीं है, लिहाजा वह विदेश नीति की अपनी स्थापित राह को नहीं छोड़ नहीं सकता। इस बार यह संदेश उसने अमेरिका के साथ-साथ इजरायल को भी दे दिया है।

इजरायल ने भारत में काफी निवेश किया है लेकिन भारत ने यरुशलम पर इजरायली कब्जे को खारिज करने वाले प्रस्ताव को पिछले 50 सालों में कई बार समर्थन दिया है। कारण स्पष्ट है।

यरुशलम मुसलमान, ईसाई और यहूदी, तीनों धर्मों के लिए एक पवित्र नगरी है और संयुक्त राष्ट्र सदा से इसकी स्वायत्तता के पक्ष में रहा है। यरुशलम के स्थानीय लोग अपने शहर में इजरायल की गतिविधियों को पसंद नहीं करते।

1947 में संयुक्त राष्ट्र ने यरुशलम के प्रशासन पर अंतरराष्ट्रीय देखरेख का फैसला किया था लेकिन 1948 में इजरायल का गठन होते ही अरब-इजरायल युद्ध शुरू हो गया। 1949 में युद्व समाप्त होने पर आर्मिटाइस सीमा खींची गई, जिससे शहर का पश्चिमी हिस्सा इजरायल और पूर्वी हिस्सा जॉर्डन के हिस्से में आया लेकिन 1967 के तृतीय अरब-इजरायल युद्ध में इजरायल ने यरुशलम के पूर्वी हिस्से को भी जीत लिया।

1980 में इजरायल ने इस शहर को अपनी राजधानी घोषित किया तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर पूर्वी यरुशलम पर इजरायल के कब्जे की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

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