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यरुशलम पर विवादित फैसले का सिर्फ़ मुस्लिम देश ही नहीं पश्चिमी देश भी कर रहे हैं अमेरिका का विरोध

न्यूयार्क। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को ईस्राइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के बाद अमरीकी दूतावास तेलअवीव से यरुशलम स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तमाम चेतावनियों को दरकिनार कर अमरीका द्वारा उठाए इस अप्रत्याशित कदम को उसकी पुरानी विदेशी नीति के विपरीत देखा जा रहा है।

हर मोर्चे पर अमरीका के साथ खड़े रहने वाले ब्रिटेन ने भी ट्रंप के फैसले को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरीका की पुरानी विदेश नीति के अनुसार यरुशलम का भविष्य ईस्राइल और फिलीस्तीन के बीच बातचीत के जरिए तय किया जाना था।

1995 में अमरीकी कांग्रेस में प्रस्ताव पास किया गया था, जिसमें दूतावास को यरुशलम में स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में जो भी अमरीकी सत्ता में आया उसने यथास्थिति बनाए रखी।

इसके लिए वे प्रत्येक 6 महीने में एक अधित्याग पत्र पारित करते थे। मगर ट्रंप ने यथास्थिति को तोड़ते हुए यरुशलम को ईस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देकर अरब जगत को भड़का दिया है।

ट्रंप के इस फैसले खिलाफ अरब लीग ने शनिवार को आपात बैठक बुलाई है। मुस्लिम देश ही नहीं, बल्कि पश्चिमी देश भी ट्रंप के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

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