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यरूशलेम साइट पर यूनेस्को द्वारा वोटिंग कराने से इज़राइल नाराज़

A general view taken on October 13, 2016, shows the Dome of Rock at the Al-Aqsa Mosque compound, a UNESCO heritage site, in the Old City of Jerusalem. Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu criticized two draft resolutions on the "Occupied Palestine" that will be submitted to UNESCO, saying the UN agency for culture had "lost whatever legitimacy it had left." / AFP PHOTO / AHMAD GHARABLI

 

यूनेस्को के सदस्य राज्यों ने यरूशलेम पवित्र स्थल में मुसलमानों के प्रवेश को सीमित करने के लिए इजराइल की नए सिरे से आलोचना करते हुए अपने एक पुराने प्रस्ताव को फिर से नया किया है | एक यूरोपीय राजनयिक सूत्र ने कहा कि इस आलोचना से इजराइल की सरकार नाराज़ है | इस नाराजगी की मुख्य वजह यरूशलेम पवित्र स्थल की केवल मुस्लिम नामों से चर्चा भी है।

 

यूनेस्को की वेबसाइट पर अक्टूबर 12 को पोस्ट गए प्रस्ताव के नए प्रारूप में, यरूशलेम पवित्र स्थल को बार-बार केवल मुस्लिम नाम से ही लिखा गया है | इसराइल का कहना है कि यह यहूदी इतिहास के इनकार के बराबर है।

 

“यूनेस्को में एक बेतुका रंगमंच जारी है और आज संगठन ने फिर एक भ्रन्तिमय निर्णय अपनाया है जो कहता है कि टेम्पल माउंट और पश्चिमी दीवार से इसराइल के लोगों का कोई संबंध नहीं है,” इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने निर्णय के बाद यरूशलेम में कहा।

 

यह प्रस्ताव, जो समय समय पर दोहराया जाता है, पवित्र स्थल पर मुसलमानों के प्रवेश को सिमित करने और वहां पुलिस और सैनिकों द्वारा आक्रामकता के लिए इसराइल की निंदा करता है। “यह घोषणा करना कि इसराइल का टेम्पल माउंट और पश्चिमी दीवार से कोई संबंध नहीं है ऐसा है जैसे कहा जाए कि चीन का चीन की महान दीवार से कोई संबंध नहीं है या मिस्र का मिस्र के पिरामिड से कोई संबंध नहीं है,” नेतनयाहू ने कहा।
नाबिल अबू रादैनाह, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह इसराइल के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि वह अपने कब्जे को खत्म करे और फिलीस्तीनी राज्य को इसकी राजधानी के रूप में यरूशलेम को सभी पवित्र मुस्लिम और ईसाई साइटों के साथ पहचाने।”

 

गुरूवार को संकल्प पर वोट करायी गयी | एक राजनयिक स्रोत्र ने बताया कि संकल्प के पक्ष में 24 वोट, इसके खिलाफ 6 वोट और दो देशों की अनुपस्थित के साथ 26 देश तटस्थ रहे | फ्रांस, जो इजरायल और फिलीस्तीन के नेताओं को साल के अंत तक वापस बातचीत की मेज पर लाने के लिए कोशिश कर रहा है, उसने पिछली बार संकल्प के पक्ष में मतदान किया था जिससे इजरायल और उसके बीच कुछ समय तक कूटनीतिक विवाद रहा था।

 

इससे पहले इस साल, राष्ट्रपति फ्रेंकोइस होल्लांदे ने कहा कि पिछले अवसर पर प्रस्ताव में एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ संशोधन किया गया था और वह इस साल के प्रस्ताव पर ‘बेहद सतर्क’ रहेंगे । पेरिस ने इस बार प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया, राजनयिक ने कहा।

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