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याक़ूब मेमन से हमदर्दी क़ौम की बद ख़िदमती: वेंकया नायडू

हैदराबाद 03 अगसट मर्कज़ी वज़ीर वेंकया नायडू ने कुछ अफ़राद की तरफ से दहश्तगर्दी और सज़ाए मौत जैसे मसाइल को सियासी रंग देने पर नाराज़गी का इज़हार किया और कहा कि याक़ूब मेमन से हमदर्दी क़ौम की बद ख़िदमती होगी।

याक़ूब मेमन को 1993 के मुंबई बम धमाकों के मुक़द्दमा में सज़ाए मौत दी गई है। नायडू ने मीडीया से बातचीत करते हुए कहा कि अफ़सोस की बात ये हैके कुछ अफ़राद हर चीज़ को सियासी रंग देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सज़ाए मौत और दहश्तगर्दी दो अलाहिदा चीज़ें हैं और उन पर मुबाहिस होसकते हैं। लेकिन जहां तक दहश्तगर्दी से मुक़ाबले का सवाल है हम को अपनी पूरी ताक़त से ये मुक़ाबला करने की ज़रूरत है।

हम दहश्तगर्दी का बदतरीन शिकार होते जा रहे हैं। दहश्तगर्द मुल्क की मईशत को नुक़्सान पहूँचाना चाहते हैं और मुल्क को कमज़ोर करना चाहते हैं। दहश्तगरदों से निमटने का जहां तक मसला है इस मुआमले में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।

मुंबई सिलसिला वार बम धमाकों के मुल्ज़िम याक़ूब मेमन को दी गई सज़ाए मौत पर जारी मुबाहिस पर वेंकया नायडू ने कहा कि उन्हें हैरत हैके कुछ लोग याक़ूब मेमन को दी गई सज़ाए मौत पर बेहस कर रहे हैं। वो ग़द्दार था। वो दहश्तगर्द था और इस ने मुल्क को भारी नुक़्सान पहूँचा या था।

याक़ूब मेमन को मुंसिफ़ाना मुक़द्दमा की समाअत का मौक़ा दिया गया और उसे फिर सज़ा सुनाकर इस पर अमल आवरी की गई। उन्होंने ताहम कहा कि कुछ लोग इस मसले को हक़ूक़-ए-इंसानी से जोड़ रहे हैं और कुछ लोग मज़हब से जोड़ रहे हैं। दहश्तगरदों का कोई मज़हब नहीं होता और ना उनकी कोई ज़ात पात होती है। दहश्तगर्द दहश्तगर्द होता है। जो कोई याक़ूब मेमन से इज़हार-ए-हमदर्दी कर रहा है वो मुल्क की बद ख़िदमती कर रहा है।

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