Thursday , December 14 2017

युद्ध में शहीद होने वाले जवानों के मुकाबले 12 गुना ज्याद जवान ‘फिजिकल कैजुअल्टी’ के होते हैं शिकार : रिपोर्ट

नई दिल्ली : एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना फिजिकल कैजुअल्टी के कारण हर साल  लगभग दो बटालियन (एक बटालियन में 700-800 जवान होते हैं) जवान खो देती है।  सबसे ज्यादा जवान सड़क दुर्घटना और आत्महत्या के कारण अपनी जिंदगी खो रहे हैं। यह संख्या जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में शहीद होने वाले जवानों की संख्या से दोगुनी है।

साल 2014 से भारतीय सेना, नेवी और एयर फोर्स ने अपने 6,500 जवान खो दिए हैं। यह 11.73 लाख की संख्या वाली मजबूत फौज के लिए एक बड़ी संख्या है। इन मौतों से एयर फोर्स और नेवी की मैनपावर में भी कमी आ रही है। सेना में युद्ध में शहीद होने वाले जवानों के मुकाबले 12 गुना ज्याद जवान ‘फिजिकल कैजुअल्टी’ के शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में बॉर्डर पर होने वाली गोलाबारी और आतंकवाद निरोधक कार्रवाई में 112 जवान शहीद हुए हैं जबकि 1,480 जवान फिजिकल कैजुअल्टी के शिकार हुए हैं। इस साल अभी तक युद्धक कार्रवाई में केवल 80 जवान ही शहीद हुए हैं लेकिन फिजिकल कैजुअल्टी में 1,060 जवान अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।

नौकरी के दबाव में होने वाली मौतें जैसे आत्महत्या या साथी/सीनियर अधिकारी की हत्या जैसे कारणों से जवानों की होने वाली मौत का आंकड़ा भी काफी बड़ा है। साल 2014 से अब तक 9 अधिकारियों, 19 जूनियर कमीशंड अधिकारियों समेत कुल 330 जवानों ने आत्महत्या की है। इस दौरान कई जवानों ने अपने साथी जवानों और अधिकारियों की भी हत्या कर दी है। सेना में जवानों पर दबाव कम करने के ‘तथाकथित’ कदम उठाए जाने के बावजूद जवानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के आंकड़ों में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है। सेना के जवान नौकरी में मिलने वाले मानसिक दबावों के अलावा परिवारिक समस्याओं, प्रॉपर्टी के विवाद, वित्तीय समस्याओं और वैवाहिक समस्याओं के कारण भी आत्महत्या कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों में चलाए जा रहे आतंकवाद निरोधी अभियानों में लंबे समय तक शामिल रहने के कारण भी जवान भारी दबाव में रहते हैं। इसके अलावा जवानों को काफी कम सैलरी, छुट्टियां और आधारभूत सुविधाएं दी जा रही हैं। हालांकि सेना ने इस समस्या से निपटने के लिए जवानों के लिए मेंटल काउंसलिंग और उनकी रहने-खाने की व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए हैं। साथ ही, जवानों को परिवार साथ रखने, आसानी से छुट्टियां देने और तुरंत शिकायत निवारण की व्यवस्था जैसी सुविधाओं में भी सुधार लाया जा रहा है

TOPPOPULARRECENT