Sunday , December 17 2017

यूनिफार्म सिविल कोड को BJP सिर्फ मुस्लिम समुदाय के बजाए सभी धर्मों से जोड़े: जुनैद हारिस

PC: The Indian Express

नई दिल्ली: विधि आयोग की ओर से तीन तलाक और यूनिफार्म सिविल कोड पर जनता की राय मांगे जाने और AIMPLB द्धारा इसका विरोध किए जाने के बाद खड़े हुए विवाद पर देश के कुछ इस्लामी जानकारों और मुस्लिम महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि तीन तलाक़ और यूनिफार्म सिविल कोड दोनों बिल्कुल अलग मुद्दे हैं इनको एक दूसरे से जोड़ने के पीछे की वजह ‘असल मुद्दों से ध्यान भटकाना’ है।

इस बात को लेकर भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की को-फाउंडर जकिया सोमान का आरोप है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तीन तलाक मामले में ‘बैकफुट पर आने’ के बाद ही इसे यूनिफार्म सिविल कोड से जोड़ने की कोशिश गई की। जकिया सोमान ने कहा, ‘विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता पर लोगों की राय मांगी है तो देश के हर नागरिक को अपनी राय देनी चाहिए।

दूसरी तरफ, जामिया मिलिया इस्लामिया में इस्लामी शिक्षा विभाग के प्रोफेसर जुनैद हारिस ने तीन तलाक़ को मुस्लिम समुदाय का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा है कि यूनिफार्म सिविल कोड के मुद्दे को सिर्फ मुसलमानों के साथ जोड़ना सरासर गलत है क्योंकि यह मुसलमानों से नहीं बल्कि देश की संस्कृति से जुड़ा मुद्दा है। भारत अलग धर्मों, आस्थाओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों वाला देश है और सभी समुदायों के अपने पर्सनल लॉ हैं। इसमें अदालत या राजनीतिक दलों का कोई दखलंदाज़ी करना गलत है।

शरिया और कुरान में इन मामलों को लेकर कई चीजें साफ़-साफ़ बताई गई हैं और तलाक के साथ कई ऐसी शर्तें हैं जो महिलाओं के हक में जाती है। इसलिए इसे महिलाओं पर थोपने का तो सवाल ही नहीं उठता। मुझे लगता है कि इस मामले पर बेवजह बवाल खड़ा किया जा रहा है।

इस्लामिक फेमिनिस्ट शीबा असलम फहमी ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड पूरी तरह राजनीतिक मामलाहै जिसे केंद्र सरकार ने सिर्फ चुनावी फायदे के लिए छेड़ा है। मुस्लिम महिलाओं का मुद्दा यह नहीं है। उनका मुद्दा सिर्फ इतना है कि इन मामलों में सिर्फ कुरान और शरीयत के मुताबिक संशोधन किए जाएं।

TOPPOPULARRECENT