Tuesday , August 14 2018

यूपीए हुकूमत को उखाड़ फेंकने को जनता बेताब: मोदी

अपनी सालगिरह के मौके पर बीजेपी के वज़ीर ए आज़म के ओहदे के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मरकज़ी हुकूमत पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि यूपीए हुकूमत के खिलाफ 'नफरत' का घड़ा भर चुका है और आम जनता इस हुकूमत को हुक्मरानी से उखाड़ फेंकने के लिए

अपनी सालगिरह के मौके पर बीजेपी के वज़ीर ए आज़म के ओहदे के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मरकज़ी हुकूमत पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि यूपीए हुकूमत के खिलाफ ‘नफरत’ का घड़ा भर चुका है और आम जनता इस हुकूमत को हुक्मरानी से उखाड़ फेंकने के लिए बेसब्री से इंतेजार कर रही है।

अपनी सालगिरह के मौके पर गांधीनगर में मंगल के दिन मुनाकिद एक प्रोग्राम में मोदी ने कहा कि जब से मैंने सियासत और इलेक्शन को समझना शुरू किया है। ऐसा पहली मरतबा देखने को मिल रहा है कि आम आदमी बेसब्री से इंतेखाबात/ चुनाव का इंतेजार कर रहा है।’

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी को बीजेपी के वज़ीर ए आज़म के ओहदे का उम्मीदवार बनाए जाने की खुशी में यह प्रोग्राम मुनाकिद किया गया था।

उन्होंने कहा कि इस बार चर्चा आम आदमी की तरफ से शुरू हुई है और उसे उम्मीद है कि जल्द से जल्द इंतेखाबात होंगे। पूरा मुल्क चुनाव की जल्दी में है और इंतेजार कर रहा है कि कब यह हुकूमत जाए।’ मोदी ने मरकज़ी हुकूमत का नाम लिए बिना कहा कि हिंदुस्तान में पहली मरतबा , मैं किसी मुंत‍खिब हुकूमत के लिए इतनी नफरत और नापसंदगी देख रहा हूं। उन्होंने कहा कि मुल्क में बदलाव की ख्वाहिश है। लोगों का यह पक्का मानना है कि मौजूदा हालात को ज़्यादा वक्त तक बनाए नहीं रखा जा सकता।

प्रोग्राम में मौजूद लोगों के मुखातिब करते हुए मोदी ने कहा कि आम आदमी इस तरह से इलेक्शन का इंतेजार कर रहा है जैसे जून की सख्त गर्मी में बारिश का इंतेजार करता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर चुनावों पर चर्चा टेलीविजन और अखबारात में होती है और लोग उम्मीदवारों की तरफ से Nominations दाखिल करने के बाद उस पर चर्चा शुरू करते हैं। लेकिन इस बार, यह उल्टा है।

कोल ब्लाक मामले की लापता फाइलों को लेकर केंद्र की यूपीए हुकूमत पर हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि कोयला घोटाले की फाइलें लापता हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि दिल्ली में पूरी हुकूमत लापता है।’ मोदी ने कहा कि नई जेनरेशन पूछना शुरू करेगी कि नक्शे में दिल्ली कहा हैं?

पहले यह महसूस होता था कि दिल्ली में हुकूमत है जो हिंदुस्तान पर राज करती है लेकिन अब यह महसूस होता है कि वहां कोई हुकूमत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘माहौल ऐसा है कि आम आदमी परेशान है। गरीब से गरीब शख्स बेचैन हो रहा है।’

————बशुक्रिया: जागरण

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