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यूपी असेंबली में ख़ातून उम्मीदवारों की नाक़िस नुमाइंदगी

लखनऊ, १२ जनवरी (पी टी आई) उत्तर प्रदेश असेंबली में जहां तक ख़वातीन की नुमाइंदगी का सवाल है तो ऐसा मालूम होता है कि इन की तरफ़ से अदम तवज्जही बरती जा रही है।

लखनऊ, १२ जनवरी (पी टी आई) उत्तर प्रदेश असेंबली में जहां तक ख़वातीन की नुमाइंदगी का सवाल है तो ऐसा मालूम होता है कि इन की तरफ़ से अदम तवज्जही बरती जा रही है।

अगर 1952 से रियासत का जायज़ा लिया जाय जिस वक़्त रियासत में पहली बार इंतिख़ाबात मुनाक़िद हुए थी, उस वक़्त से लेकर आज तक रियासत यूपी में 15 बार इंतिख़ाबात का इनइक़ाद अमल में आचुका है लेकिन अगर इलैक्शन कमीशन के आदाद-ओ-शुमार का तजज़िया किया जाये तो ये पता चलेगा कि अब तक यूपी असैंबली में मुंख़बा ख़ातून नुमाइंदों का तनासुब सिर्फ़ 4.4 फ़ीसद रहा।

1952 से 2007 तक कांग्रेस ने 338 ख़ातून उम्मीदवारों को टिकट दिए जो तमाम सयासी पार्टीयों से ज़्यादा तनासुब है जिस का औसत फ़ी इलेक्शन 24 ख़वातीन है। समाजी पाबंदीयों के बावजूद ख़वातीन ने भी सियासत में अपना हिस्सा बटोरने की कोशिश ज़रूर की।

इस का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गुज़श्ता 15 असैंबली इंतिख़ाबात के दौरान 1985-ए-ख़वातीन ने इंतिख़ाबी मैदान में अपनी क़िसमत आज़माई की थी जिन में से 826 ख़वातीन ने आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर क़िसमत आज़माई की थी जिस का तनासुब 41.61 फ़ीसद रहा, हालाँकि ये भी एक बिलकुल अलग मुआमला है कि 826 के मिनजुमला सिर्फ तीन ख़वातीन विधान सभा तक पहुंचने में कामयाब रहीं।

इंतिख़ाबी कमीशन के डाटा के मुताबिक़ 1977 में सनदीला नशिस्त से आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर पहली बार कामयाब होने वाली ख़ातून का नाम क़ुदसिया बेगम था जिस के बाद 1989 में गौरी बाज़ार इलाक़ा से कामयाब रहने वाली ख़ातून का नाम लाल झाड़ी था।

तीसरी ख़ातून मंजू थी जिन्हों ने 1996 में बलिया नशिस्त से कामयाबी हासिल की थी, जहां तक दीगर सयासी जमातों का सवाल है जैसे सोशलिस्ट पार्टी, किसान मज़दूर प्रजा पार्टी , प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनतादल, भारतीय क्रांति दिल और समाजवादी पार्टी ने अब तक मजमूई तौर पर 122 ख़ातून उम्मीदवारों को मौक़ा दिया है।

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