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‘यूपी उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए सबक और आईना है’

केंद्र में सत्ता कायम करने के सपने देख रही कांग्रेस पार्टी को कल गोरखपुर से सामने हुए उपचुनाव के नतीजों ने फिर एक बार आईना दिखाकर हक़ीक़त से रूबरू करवाया है।

एक ओर जहां समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार की पार्टी भाजपा को पछाड़ते हुए गोरखपुर और फूलपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस यहां लगातार सातवीं बार अपनी जमानत बचा सकने में नाकाम रही। हम आपके लिए लाए हैं वो 7 चुनावी आंकड़े जिसमे कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई।

इस साल गोरखपुर उपचुनाव में कांग्रेस ने डा. सुरहिता करीम को मैदान में उतारा था। लेकिन वे अपनी जमानत तक नहीं बचा सकीं। उन्हें महज 18858 वोट मिले।

इससे पहले 2014 में अष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी योगी लहर में बहकर जमानत जब्त करवा चुके हैं, उस समय उन्हें 45693 वोट मिले थे। वर्ष 2009 में कांग्रेस के लालचंद निषाद भी योगी के प्रभाव के कारण मात्र 30262 वोट ही जुटा पाए थे।

2004 के आम चुनाव में कांग्रेस ने शरदेंदु पांडेय का उतारा, लेकिन वे भी सिर्फ 33477 वोट हासिल कर सके. 1999 में कांग्रेस ने यहां से मुस्लिम प्रत्य़ाशी डॉ. सैयद जमाल को उतारा लेकिन वे भी कोई कमाल नहीं दिखा सके और सिर्फ 20026 वोट पा सके।

1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस की ओर से लगातार दूसरी बार हरिकेश बहादुर उतरे, लेकिन उन्हें भी सिर्फ 22621 वोट ही मिले। 1996 के चुनाव में हरिकेश बहादुर 14549 वोट ही पा सके, जो जमानत बचाने में भी सफल नहीं हो सके।

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