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यूपी उपचुनाव: बीजेपी को हराने के लिए मुसलमानों ने बाहुबली नेता अतीक अहमद को भी नहीं दिया वोट!

फूलपुर उपचुनाव में बाहुबली अतीक अहमद ने ताल ठोक कर यूपी की सियासत गरमा दी थी। बाहुबली अतीक अहमद इलाहाबाद शहर पश्चिमी से पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा से सांसद रह चुके है।

नामांकन के आखिरी दिन बाहुबली अतीक ने पर्चा दाखिल कराया ,और सलाखों के पीछे से सियासी दलों की समीकरण में सेंध लगाने की कोशिश में जुट गए।

अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर अतीक ने अब्बा को जिताने के लिए गांव गांव गली गली और शहरों की खाक छानने लगे । खबर यह भी आयी की ,अतीक अहमद को मायावती का समर्थन है ।इस खबर में सियासी गलियारों में भूचाल मचा दिया ।

भारतीय जनता पार्टी सहित समाजवादी पार्टी अपनी गोटियाँ सेट करने में लग गये।आखिर में मायावती सामने आयी ,और उन्होंने अखिलेश को समर्थन दे दिया।सपा बसपा के समर्थन के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया।

अपने बड़े नेताओं की पूरी टीम फूलपुर लोकसभा में उतार दी।वही विरोधी अतीक को भाजपा का एजेंट बताने में लग गये।भाजपा भी मंचो से अतीक पर वार करना शुरू कर दिया लेकिन कुछ नही हुआ।

बाहुबली अतीक जिसे उनके अपने क्षेत्र की जनता ने पांच बार विधायक और फूलपुर से सांसद चुना इस बार वो भी अतीक से दूर दिखे । न उनका खौफ काम आया और न ही उनके लोगो की मेहनत रंग ला सकी।

अतीक अहमद सपा के खिलाफ बना रहे रणनीत पर पानी फिर गया ,और सपा की जीत में बड़ी सेंध नही लगा सके।शहर पश्चिमी को छोड़कर अतीक अहमद कुछ खास पकड़ वोट नही पाए।

जिसके चलते सपा की जीत सुनीश्चित हो गई। फूलपुर उपचुनाव में फाफामऊ, सोरांव एवं फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़े मतदान में प्रत्याशियों के मिले मतों को देखे तो सपा ने फूलपुर, सोरांव एवं फाफामऊ विधानसभा क्षेत्र में सपा लगातार लीड पर रही।

और लगभग पचास हजार की बढ़त बना ली। भाजपा को उम्मीद थी की शहर उत्तरी व शहर पश्चिमी में पड़े मतदान प्रतिशत से उसकी भरपाई होगी जो नही हो सकी ।

बाहुबली अतीक अहमद के बेटे उमर लगातार मुस्लिम क्षेत्रो में डटे रहे । कौम की एकता के लिये अपने अब्बा के समर्थन में वोट करने की अपील की लेकिन माना जा रहा है कि मुस्लिम मतदाता शहर पश्चिमी को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्रों सपा के पक्ष में एक जुट होकर चला गया। जिसके चलते सपा अपनी बढ़त बना ली।

जिसका परिणाम यह रहा कि सपा ने भाजपा को पटखनी देने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही सबसे अधिक सपा और बसपा के गठबन्धन ने भाजपा को करारा झटका दे दिया। जिसे लेकर भाजपा के नेता पूरी तरह से अस्वस्थ थे।

कि बसपा का वोट बैंक सपा के खेमें में नहीं जायेगा। लेकिन मायावती के समर्थन से यह साबित कर दिया कि एक इशारे पूरी बाजी पलट दी।

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